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दिसंबर, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या हम सब भी बलात्कारियों से कुछ कम हैं..?

क्या हम सब उन चंद बलात्कारियों से कुछ कम हैं? बस फर्क यह है कि उनकी बर्बरता और क्रूरता उजागर हो गयी है और हम अपनी खाल में अब तक छिपे हुए हैं.शायद हमारी असलियत सामने आना इतना आसान भी नहीं है क्योंकि हमने अपने असली चेहरों को मुखोटों से छिपा रखा है,हमारे खून से सने नाख़ून खुलेआम नजर नहीं आते और अंदर से जानवर और हैवान होते हुए भी बाहरी आवरण के कारण हम संभ्रांत दिखाई पड़ते हैं. क्या महिलाओं के साथ यौन अत्याचार ही बलात्कार है?..तो फिर वह क्या है जो हम रोज,हरदिन सालों साल से महिलाओं के साथ करते आ रहे हैं? चंद पैसों के लिए गर्भ में बेटियों की मौजूदगी के बारे में बताने वाले डाक्टर क्या बलात्कारियों से कम क्रूर हैं. डाक्टर तो फिर भी पैसों के कारण अपने पवित्र पेशे से बेईमानी कर रहे हैं पर हम स्वयं क्या अपनी जिम्मेदारी ढंग से निभा रहे हैं? अपनी अजन्मी बेटी को कोख में मारने की अनुमति और उसका खर्च भी तो हम ही देते हैं.नवजात बच्ची को कभी दूध में डुबाकर तो कभी ज़िंदा जमीन में दफ़न करने वाले भी तो हम ही हैं...और यदि इतनी अमानवीयता के बाद भी बेटियों ने जीने की इच्छाशक्ति दिखाई तो फिर उसे कूड़े के

कुछ तो अलग था हमारे वेद में .....!

क्या नियति के क्रूर पंजों में इतनी ताकत है कि वो हमसे हमारा वेद छीन सके? या फिर काल इतना हठी हो सकता है कि उसे पूरी दुनिया में बस हमारा वेद ही पसंद आए? सब कह रहे हैं कि वेद हमारे बीच नहीं रहा,हमारा प्यारा वेद अब ईश्वर के दरबार में अपना रंग जमाएगा. हम में से कोई भी यह सोच भी नहीं सकता था कि ईश्वर के कथित ‘पैरोकारों’ से हमेशा दो-दो हाथ करने वाले वेद की जरुरत खुद ईश्वर को पड़ सकती है.शायद ईश्वर सीधे वेद से ही यह जानना चाहता होगा कि समस्याओं,चिंताओं और परेशानियों से भरी मेरी दुनिया में तुम इतने बेफ़िक्र-बेलौस और खिलंदड कैसे रह सकते हो?     वेद यानि वेदव्रत गिरि, एटा के पास छोटे से गाँव की एक ऐसी शख्सियत जिसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं था.वह पत्रकार भी था और यारों का यार भी,लेखक भी था और दोस्तों का आलोचक भी,कवि भी था और मित्रों का गुणगान करने वाला भी,पटकथा लेखक भी था और अपने ही भविष्य से खेलने वाला अभिनेता भी...क्या नहीं था हमारा वेद और क्या नहीं कर सकता था हमारा वेद. कल ही की बात लगती है जब हम सब यानि कुल जमा ४० युवा भोपाल में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में मिले थे औ