संदेश

“अयोध्या 22 जनवरी": अयोध्या के बारे में जानकारीपूर्ण, दिलचस्प, विस्तृत और विचारोत्तेजक विवरण

चित्र
           ।।विश्व पुस्तक दिवस पर विशेष।।  “अयोध्या 22 जनवरी" पुस्तक में, लेखक संजीव शर्मा पाठकों को भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक के माध्यम से एक मनोरंजक यात्रा पर ले जाते हैं और कुशलता से अयोध्या की मनोरम जानकारी से परिचित कराते हैं। यह पुस्तक 22 जनवरी, 2024 को राम मंदिर के ऐतिहासिक उद्घाटन से पहले और उसके बाद की घटनाओं की व्यापक समझ प्रदान करती है। 'अयोध्या 22 जनवरी' पुस्तक की कथावस्तु अयोध्या को आकार देने वाले सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य का एक विचारशील अन्वेषण है। पुस्तक में कहानी कहने का ढंग इतना आकर्षक है कि यह विद्वानों से लेकर अयोध्या की जटिलताओं से अपरिचित लोगों दोनों के लिए सरल भाषा और रोचक शैली में सामग्री उपलब्ध कराती है। पुस्तक की भाषा लेखक की पहली किताब ‘चार देश चालीस कहानियां’ की तरह रोचक और सरल दोनों है । अयोध्या के बारे में जानकारीपूर्ण, दिलचस्प, विस्तृत और विचारोत्तेजक विवरण चाहने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए अत्यधिक अनुशंसित पुस्तक। “अयोध्या22जनवरी” पर कुछ पाठकों की प्रतिक्रिया  माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्र...

क्या है ओल्ड मंक, जनरल डायर और देवभूमि का रिश्ता..!!

चित्र
आजादी की लड़ाई की सबसे निर्मम घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए जिम्मेदार क्रूर ब्रिटिश अधिकारी जनरल डायर का देवभूमि हिमाचल प्रदेश से क्या संबंध है? इसी तरह, भारत सहित दुनिया भर में मशहूर रम ‘ओल्ड मंक’ का देवभूमि से क्या रिश्ता है?..और इस सबसे जरूरी सवाल कि जनरल डायर,ओल्ड मंक एवं हिमाचल प्रदेश आपस में कैसे जुड़े हैं?  सबसे पहले बात ओल्ड मंक की। रम का पर्याय यह ब्रांड अपनी विरासत, विशिष्ट स्वाद और कम हैंगओवर के लिए भारत ही नहीं दुनिया के 50 से ज्यादा देशों में लोकप्रिय है। वर्ष 2024-25 में ओल्ड मंक ने लगभग 1.3 करोड़ पेटी की बिक्री की जो प्रतिद्वंद्वी ब्रांड से बहुत ज़्यादा हैं लेकिन यह बात कम लोग ही जानते होंगे कि ‘बूढ़े साधू’ यानि ओल्ड मंक का जन्म देवभूमि हिमाचल प्रदेश में हुआ है। आज करीब 70 साल बाद भी यह डार्क रम सेगमेंट में मार्केट लीडर है। कंपनी की कुल बिक्री का 80 फ़ीसदी हिस्सा इसी ब्रांड से आता है। अब रही जनरल डायर के हिमाचल कनेक्शन की बात तो ओल्ड मंक ब्रांड ने जिस डिस्टिलरी या ब्रूअरी में जन्म लिया है,उसकी स्थापना जनरल डायर के पिता ने ही की थी और यह ब्रूअरी हिमाचल प्रदेश क...

क्या है प्री 42, सेटलर और 10 इयर्स की कहानी..!!

चित्र
प्री 42, सेटलर, 10 इयर्स और 2003/04 को पढ़कर आपके दिमाग में क्या आ रहा है? यही न, की यह कोई गणितीय पहेली है लेकिन हकीकत यह है कि यह कोई गणित का जोड़ घटाना नहीं बल्कि सुविधाएं प्रदान करने की सीमा है। वैसे, इन संख्याओं को देखकर मुझे भोपाल के बस स्टॉप की याद जरूर आ गई क्योंकि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बस स्टॉप के नाम नहीं बल्कि नंबर हैं। यहां 6 नंबर, 7 नंबर, 10 नंबर, 11 नंबर जैसे दसियों बस स्टॉफ हैं । अब तो बस स्टॉप के नामों की संख्या पौने छह, सवा छह और साढ़े छह तक पहुंच गई है।  खैर, अभी बात इस लेख में दी गई संख्याओं की करते हैं। आमतौर पर देश में आरक्षण या सुविधाएं देने के लिए आबादी, अनुसूचित जाति या जनजाति जैसे अलग अलग आधारों का सहारा लिया जाता है लेकिन हमारे देश में एक राज्य ऐसा भी है जहां लोगों को सुविधाएं या सुविधाओं में आरक्षण प्रदान करने के लिए वर्ष को आधार बनाया गया है। यह है अंडमान और निकोबार द्वीप समूह..जहां  स्थानीय लोगों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वर्ष मुख्य आधार है। मुझे लगता है कि अब आप शायद बात को कुछ कुछ समझने लगे होंगे। फिर भी और सहज भाषा में सम...

अबोलेपन से परिवारों में बढ़ता अलगाव..!!

चित्र
तकनीक ने हमारे जीवन को सहज बनाने के साथ-साथ जटिल भी बना दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर मां-बाप और बच्चों के बीच के रिश्ते पर पड़ रहा है और परिवार एक अनजानी दूरी का शिकार हो रहे हैं । यह दूरी केवल शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक अधिक है। अविश्वास, अबोलापन और संवाद की कमी ने इस परिवारों के करीबी रिश्तों को कहीं न कहीं खोखला करना शुरू कर दिया है।  चिंता की बात यह है कि मां-बाप और बच्चों के बीच अविश्वास की जड़ें आमतौर पर छोटी-छोटी गलतफहमियों से शुरू होती हैं। आज के बच्चे डिजिटल दुनिया में पल रहे हैं, जहां उनकी निजता और डिजिटल स्वतंत्रता उनके लिए सर्वोपरि है। दूसरी ओर, पारंपरिक मूल्यों और अनुभवों से निर्देशित माता पिता अपने बच्चों की इस नई दुनिया को पूरी तरह समझ नहीं पाते। नतीजा यह होता है कि बच्चे अपनी बातें खुलकर साझा नहीं कर पाते हैं और माता-पिता को लगता है कि बच्चे उनसे कुछ छिपा रहे हैं। यह आगे चलकर अविश्वास का एक दुष्चक्र बन जाता है। मसलन, एक किशोर जो अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर घंटों समय बिताता है, वह माता-पिता की नजर में गलत संगत में पड़ सकता है। माता-पिता की बार-बा...

शेखचिल्ली: हास्य कथाओं का नायक या आध्यात्मिक गुरु..!!

चित्र
…जैसे ही कोई हमारे बीच लंबी चौड़ी हांकने की कोशिश करता है, तो हम तुरंत कह देते हैं न कि शेख चिल्ली मत बनो। आमतौर, शेख चिल्ली की छवि एक मजाकिया, भोले भाले, अनपढ़ और ख्यालीपुलाव पकाने वाले किरदार की है। शेखचिल्ली पर केंद्रित न जाने कितनी ऐसी कहानियां और मुहावरे प्रचलित हैं जिनमें उसे बढ़ चढ़कर सोचने वाला या ख्यालीपुलाव पकाने वाला बताया गया है। एक कहानी में शेख चिल्ली को उसकी माँ दही बेचने बाज़ार भेजती है। रास्ते में दही का कटोरा सिर पर रखे चलते हुए वह सोचता है कि दही बिकेगा तो पैसे आएँगे, इन पैसों से मैं पहले बकरियाँ खरीदूँगा, फिर बकरियाँ बच्चे देंगी, बकरी का दूध बेचकर भेड़ खरीद लूंगा और फिर ऊन बेचूँगा। जब ज्यादा पैसा जमा हो जाएगा तो घोड़ा खरीद लूंगा और फिर घोड़े पर सवार होकर निकलूँगा तो राजकुमारी मुझ पर फिदा हो जाएगी और फिर हमारी शादी हो जाएगी। शादी के बाद बच्चे होंगे लेकिन यदि बच्चे शैतानी करेंगे तो मैं डाँटूँगा भी और मारूंगा भी... बस, फिर क्या था सोचते हुए शेखचिल्ली बच्चों को मारने लगता है और कटोरा गिर जाता है और सारा दही फैल जाता है । खाली हाथ घर लौटने पर माँ पूछती है कि दही कहाँ है?...

सेल्यूलर जेल: खूबसूरत भवन की निर्मम और दर्दनाक दास्तां..!!

चित्र
विशाल फूल की सात आकर्षक पंखुड़ियां कहो या घड़ी के कांटे या साइकिल के पहिए की तर्ज पर सीधी और चक्र की भांति घूमती हुई सात कतारों से बनी इमारत.. जो वास्तुकला का उत्कृष्ट एवं बेजोड़ नमूना है। न उस समय देश में इतनी आकर्षक कोई इमारत थी और न ही आज है। यह इमारत कुछ इस तरह बनी है कि यहां कभी रहने वाले छह सौ से ज्यादा लोग एक दूसरे से बात करना तो दूर परस्पर देख भी नहीं सकते थे। वे, बस अपने मन की आंखों से यह महसूस कर सकते थे कि उनके आसपास भी उनके ही जैसे लोग मौजूद हैं। लेकिन इन सैकड़ों लोगों पर नज़र रखने के लिए महज एक ही पहरेदार की जरूरत पड़ती थी और वह इमारत के बीचों बीच बैठकर सातों विंग की बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के निगरानी रखता था।  कभी इस इमारत की खूबसूरती बढ़ाने वाली लाल ईंटे आज रक्त रंजित दिखाई पड़ती हैं। ऐसा लगता है जैसे खून से रंगी ये दीवारें चीख चीखकर निर्मम यातना के पीड़ादायक किस्से सुना रहीं हैं और इस इमारत के परिसर में मौजूद पीपल का वृक्ष इन भयावह किस्सों की गवाही दे रहा है। हम बात कर रहे हैं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर (अब श्री विजयपुरम) में स्थित सेल्यू...

सुकून के साथ सनातन संस्कृति का अनूठा संगम..!!

चित्र
  अक्षरधाम, बिड़ला मंदिर की तर्ज पर देवभूमि का मोहन शक्ति हेरिटेज पार्क..सुकून, शांति, सद्भाव और ध्यान का सर्वोत्तम स्थान। प्रकृति की गोद में पहाड़ियों से घिरा हुआ  बेहद शांत, स्वच्छ और निर्मल इलाका। हवा में गूंजती भजन की मद्धम स्वर लहरी, चारों ओर से झांकते ऊंचे ऊंचे शिखर, धरती पर बिखरे रंग बिरंगे फूल, मनमोहक हवा और मंदिर में सभी देवी देवताओं के साथ विराजी मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा। नवरात्रि पर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मंदिर के द्वार पर सूर्यदेव और पूरे परिसर में तमाम दैविक कथाओं के साथ भूत, पिशाच की भी जीवंत प्रतिमाएं। जैसे मंदिर के प्रवेश द्वार पर सीढ़ियों के दोनों ओर देव और ऋषि की प्रतिमाएं दिखाई देती हैं। यहां भगवान शिव, विष्णु-लक्ष्मी, पंचमुखी हनुमान, शनि देव, नरसिंह अवतार आदि की मूर्तियां भी हैं। यहां तक कि परिसर के पार्क में बनी पशु पक्षी और इंसान की मूर्तियां भी इतनी जीवंत हैं, जैसे अभी बोल पड़ेंगी। आप जहां भी नजर दौड़ाएंगे आपको ऐसी अनेक प्रतिमाएं नजर आती हैं । इस राष्ट्रीय धरोहर पार्क में बनी तमाम मूर्तियां ओडिशा, पश्चिम बंगाल और राजस्थान के मूर्तिकार...