नारद मुनि: केवल पत्रकार नहीं, प्रथम ‘सोशल मीडिया पत्रकार’..!!
आज सूचना क्रांति के दौर में जब सूचना की रफ्तार इंटरनेट और सोशल मीडिया से तय हो रही है एवं सोशल मीडिया पर हर सेकंड लाखों खबरें, रील्स और पोस्ट वायरल हो रही हैं, तब यह सवाल दिलचस्प लगता है कि क्या प्राचीन काल में भी ऐसा कोई संचार तंत्र था? इसका उत्तर पौराणिक कथाओं में ही मिलता है। पौराणिक संदर्भों में देवर्षि नारद का व्यक्तित्व इस सवाल का सटीक जवाब प्रस्तुत करता है। उन्हें केवल एक ऋषि या भक्त के रूप में नहीं, बल्कि सूचना और संवाद के प्राचीन वाहक के रूप में भी देखा जाता रहा है। धार्मिक कथा कहानियों के अनुसार ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और भगवान विष्णु के परम भक्त नारद मुनि तीनों लोकों—स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल—में निर्बाध विचरण करते थे। वे जहां भी जाते, वहां की घटनाओं, परिस्थितियों और संदेशों को एकत्र कर दूसरे स्थान तक पहुंचाते। यह कार्य आधुनिक पत्रकारिता की मूल परिभाषा से काफी हद तक मेल खाता है—सूचना जुटाना, उसका संप्रेषण करना और समाज को प्रभावित करना। नारद मुनि की सबसे प्रमुख खासियत उनकी निष्पक्षता और गतिशीलता थी। वे देवताओं, असुरों और मनुष्यों—सभी के बीच समान रूप से संवाद स्थापित करते थे। उ...