...सुकून संक्रामक है !!
एक दिन पत्नी ने यूँ ही सामान्य रूप से कहा, “सुनो, मैं थोड़ी देर के लिए अपनी दोस्त के साथ बाहर जा रही हूँ।” पति, जो अपने फोन में व्यस्त था, बस हल्का सी नजर उठाकर बोला, “ठीक है। मज़े करना।” पत्नी थोड़ी हैरान रह गई। आमतौर पर वह पूछता—“ज़रूरी है क्या?” “इतनी देर क्यों?” “जल्दी आना।” लेकिन उस दिन—कुछ नहीं। न कोई सवाल, न कोई नाराज़गी—बस एक शांत “ठीक है।” कुछ घंटों बाद, उनका किशोर बेटा रसोई में आया। उसके हाथ में एक पेपर था, चेहरा फीका पड़ा हुआ। “पापा,” उसने धीरे से कहा, “मेरे मॉक एग्ज़ाम के रिज़ल्ट आ गए… और बहुत खराब हैं।” वह वहीं खड़ा रह गया, डांट के लिए तैयार। उसे पता था कि पापा हमेशा पढ़ाई को लेकर चिंतित रहते हैं, और अब लंबा लेक्चर मिलेगा। लेकिन पापा ने शांत स्वर में कहा, “ठीक है।” बेटा हैरान होकर बोला, “बस… ठीक है?” “हाँ,” उन्होंने नरमी से कहा। “अगर तुम ज्यादा पढ़ोगे तो अगली बार बेहतर करोगे। नहीं पढ़ोगे तो शायद सेमेस्टर दोहराना पड़े। फैसला तुम्हारा है। मैं हर हाल में तुम्हारा साथ दूँगा।” बेटा स्तब्ध रह गया। पापा इतने शांत कब से हो गए? अगले दिन, उनकी बेटी घबराते हुए अंदर आई। “पापा… मैंने क...