फ्लैग प्वाइंट..जहां समंदर की लहरें देती हैं तिरंगे को सलामी!!
तिरंगा धीरे धीरे…लेकिन मजबूती के साथ ऊपर उठ रहा था और इसके साथ-साथ सैकड़ों लोगों की आशाएं, उम्मीदें और आजादी की आकांक्षा समंदर की उछाल भरती लहरों के साथ जयघोष कर रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई सपना हकीकत में बदल रहा हो और समंदर स्वयं इस बात का साक्षी बन रहा हो। तिरंगा में सबसे पहले केसरिया रंग ने सूरज की किरणों के साथ आंख से आंख मिलाकर विजय का शंखनाद किया। फिर, सफेद रंग ने सत्य की ताक़त का संदेश दिया और अंत में हरे रंग ने हरे भरे द्वीप से यह स्पष्ट कर दी कि-‘अब यह धरती हमारी है।’ हम बात कर रहे हैं 30 दिसंबर 1943 की…वह दिन, जो आज भी हमारी आजादी के लोकतांत्रिक पटल पर सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। जब तिरंगा ध्वज स्तंभ (फ्लैग पोल) के शिखर पर पहुंचा तो ऐसा लगा जैसे सैकड़ों साल की गुलामी की जंजीरें एक साथ टूट गई हों। भारत को मिली स्वतंत्रता से करीब चार पहले तिरंगा फहराकर आजादी का ऐलान करने वाले शख़्स थे - नेताजी सुभाष चंद्र बोस और स्थान था-अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की मौजूदा राजधानी पोर्ट ब्लेयर, जिसे अब हम श्री विजयपुरम के नाम से जानते हैं । यह ऐतिहासिक घटना देश के स्वतंत्रता स...