प्रेम में डूबी एक अल्हड़ प्रेयसी और दूसरी परिपक्व संगिनी..!!
…ऐसा लग रहा था जैसे किसी खूबसूरत श्वेत-वसना अल्हड़ युवती ने अपने गले में हीरे-मोतियों का अनुपम हार धारण कर लिया हो और वह अपने प्रेमी की अनंत प्रतीक्षा में बाँहें फैलाकर आतुरता से ताका झांकी कर रही है क्योंकि पहाड़ों के गोल गोल रास्ते बार बार एक ही दृश्य हमारे सामने लाते रहते हैं। बस, इस दृश्य से हमारी दूरी कुछ कम ज्यादा होती रहती है। धर्मशाला से मैकलोडगंज के लिए चढ़ते हुए आप कुछ ऐसा ही महसूस करते हैं जैसे पहाड़ झांक झांक कर आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। यहां बर्फ को हम श्वेतवासना युवती की पवित्रता और रोशनियों को उसकी मुस्कान कह सकते हैं। अपने प्रेमी (पर्यटक) के इंतजार में हर रात वह स्वयं को इस तरह के मनमोहक श्रृंगार से सजाती है। दरअसल, जब हम धर्मशाला से मैकलोडगंज की ओर बढ़ रहे थे तब तक सूरज ढल चुका था और चांद की शह पाकर धौलाधार की ऊँची चोटियों पर बिछी बर्फ की सफेद चादर चांदी सी दमक रही थी और उसके नीचे मैकलोडगंज शहर की असंख्य रोशनियाँ जगमगा रहीं थीं। मैकलोडगंज के ठीक नीचे करीब 10 किमी की दूरी पर धर्मशाला है। जीवन के अनुभवों से समृद्ध, आत्मविश्वास से भरी, एक परिपक्व पत्नी की...