लेखकों को क्यों इतना पसंद आता है शिमला..!!
आखिर, शिमला में ऐसा क्या है कि दुनिया भर के नामी लेखक यहां खिंचे चले आते हैं? कोई यहां रहकर किताब लिखना चाहता है तो कोई यहां की वादियों पर ही शब्द चित्र उकेरने लगता है। कुछ तो ऐसा खास है देवभूमि हिमाचल प्रदेश और इसकी राजधानी में, जो हर छोटे बड़े रचनाकार को अपने मोहपाश में जकड़ लेता है। यह तो ज़ाहिर बात है कि लेखन के लिए मानसिक शांति और एकांत की आवश्यकता होती है। शिमला के घने देवदार-चीड़ के जंगल, धुंध भरी सुबह और आमतौर पर बर्फ़ से ढकी पहाड़ियों की शांति लेखकों को रचनात्मक वातावरण प्रदान करती हैं। जिससे वे बाहरी शोर से दूर होकर अपने विचारों को शब्द दे पाते हैं। शायद, यही कारण है कि निर्मल वर्मा जैसे लेखकों की रचनाओं में शिमला का शांत और सुकून भरा माहौल स्पष्ट रूप से झलकता है। हिमालय की गोद में बसे इस शहर का प्राकृतिक सौंदर्य भी कवियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने यहाँ की वादियों से प्रभावित होकर अपनी प्रसिद्ध कविताओं की रचना की। यहां के पहाड़ों का बदलता मौसम, बर्फबारी और मनमोहक सूर्यास्त लेखकों की कल्पनाशीलता को नई उड़ान देते हैं। शिमला की एक अनूठी वि...