नाश्ता नहीं, हमारी पहचान है…पोहा
कुछ व्यंजन केवल भोजन नहीं होते, वे हमारी सुबह की पहचान बन जाते हैं। पोहा भी ऐसा ही एक स्वाद है, जो रसोई से उठती हल्दी, कढ़ी (करी) पत्ते और भुनी मूंगफली की खुशबू के साथ दिन की शुरुआत को खास बना देता है। चावल के साधारण दानों से तैयार यह व्यंजन भारत की विविधता का भी प्रतीक है—हर प्रदेश में इसका नाम और स्वाद बदल जाता है, लेकिन लोकप्रियता नहीं। हल्का, पौष्टिक और झटपट बनने वाला पोहा पीढ़ियों से भारतीय नाश्ते की शान है। शायद इसलिए एक प्लेट पोहा केवल भूख नहीं मिटाता, बल्कि अपनापन भी परोसता है। यह बात शायद कम लोग जानते होंगे कि हर वर्ष 7 जून को विश्व पोहा दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत के सबसे लोकप्रिय और सर्वसुलभ नाश्तों में से एक पोहा को समर्पित है। भले ही इस दिवस के पीछे कोई लंबा इतिहास या आधिकारिक पृष्ठभूमि न हो, लेकिन भारतीय जनजीवन में पोहे की गहरी पैठ इसे एक विशेष पहचान दिलाती है। जिस देश में लाखों लोगों की सुबह चाय और पोहे की खुशबू से शुरू होती हो, वहां इस व्यंजन के नाम एक दिन होना बिल्कुल स्वाभाविक लगता है। पोहा दरअसल चावल से बनाया जाता है। धान को विशेष प्रक्रिया से तैयार कर चपटा क...