जांबाजों की वीरता का साक्षी है मिनी इंडिया गेट..!!
हम इसे ‘मिनी इंडिया गेट’ कह सकते हैं..छोटा इंडिया गेट लेकिन महत्व के मामले में जरा भी पीछे नहीं..बस, आकार प्रकार, डिजाइन और शहीदों के दर्ज नामों की संख्या के लिहाज से हम इसे मिनी इंडिया गेट कह रहे हैं। वैसे, इसका वास्तविक नाम ‘घंटाघर’ है जिसे ‘क्लॉक टॉवर’ के नाम से भी जाना जाता है। देश का गौरव इंडिया गेट राष्ट्रीय राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण इलाके में बना है जबकि घंटाघर दिल्ली से लगभग ढाई हज़ार किलोमीटर दूर एवं चारों ओर से समुद्र से घिरे पोर्ट ब्लेयर में। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर (अब श्री विजयपुरम) के बीचों बीच बना घंटाघर यहां का एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल और पहचान का प्रतीक है। पीले रंग का यह स्तंभ शहर का गौरव है। खास बात यह है कि इस घंटाघर में चारों ओर चार घड़ी लगीं हैं जो किसी दौर में अलग-अलग समय क्षेत्र दिखाती थीं और दशकों से इस शहर के लोगों के समय पर काम करने का माध्यम थीं । अब रखरखाव के अभाव एवं तकनीकी जटिलताओं की वजह से घड़ियों की यह खूबी तो नहीं रही लेकिन यह स्तंभ आज भी शहर की धड़कन का अहम स्थान है। बताया जाता है कि घंटाघर का निर्माण 1921-1922 में हुआ था...