कहाँ से लाते हो इतना तेज़, सौंदर्य और अहसास...अमलतास !!!!
गर्मी से दहक रहे मैदानी इलाकों में सुनहरी आभा से जगमगाता यह पेड़ बरबस ही/ बार बार अपनी ओर खींच रहा था..और फिर क्या था हम भी खुद को रोक न सके और उससे जान पहचान बढ़ाने के लिए उसके पास जाने के लिए विवश हो गए… वैसे इश्क़ भी तो यही करता है..अपनी ओर खींचता है और आप बेबस से खिंचे चले जाते हैं। मैंने पहले कभी इतने ध्यान से इस पेड़ को फूलते नहीं देखा था क्योंकि प्रकृति से थोड़ा सा भी प्यार करने वाले हर शहर/इलाक़े में चटक केसरिया-लाल फूलों से लदे गुलमोहर और रंग बिरंगे तितलियों से फूलों से भरे बोगनबेलिया आपको कुछ और देखने ही नहीं देते या फिर शाम ढलते ही मधुमालती की महक हमारा आपका ध्यान भटका देती है लेकिन जब तपती दोपहर में 45 डिग्री तापमान में सूरज से निडर होकर नैन मटक्का करते इन फूलों को देखा तो फिर न मन माना और न ही मोबाइल का कैमरा।..आख़िर सूरज की तपिश से उसी का रंग लेकर मनमोहक नजारों वाले इस ‘अमलतास’ के पेड़ में कुछ तो अलग है,जो इसे खास और बहुत खास बनाता है। अमलतास की खास बात यह भी है कि गर्मियों की तपती दोपहर में जब अधिकांश पेड़ मुरझाए से दिखाई देते हैं, तब पीले फूलों से लदा यह पेड़ मानो...