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फ़रवरी, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

असम: जहाँ नागरिकों को साबित करनी पड़ रही है अपनी नागरिकता !!

असम में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का पहला मसौदा जारी होने के बाद गहमा गहमी का माहौल और बढ़ गया है । पहले मसौदे में राज्य के कुल 3 . 29 करोड़ आवेदनों में से 1.9 करोड़ लोगों को कानूनी रूप से भारत का नागरिक माना गया है लेकिन अभी नही तक़रीबन दो करोड़ लोगों का भविष्य दांव पर है क्योंकि यदि वे यह प्रमाणित नहीं कर पाए कि वे भारत के नागरिक हैं तो उन्हें न केवल यहाँ के नागरिकों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से हाथ धोना पड़ेगा बल्कि देश छोड़ने की नौबत भी आ सकती है । असम देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस अर्थात राष्ट्रीय नागरिक पंजीयन या एनआरसी है । सबसे पहले वर्ष 1951 में असम में एनआरसी तैयार किया गया था । दरअसल असम में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और अन्य विदेशी लोगों की पहचान कर उन्हें बाहर निकालने के लिए एनआरसी की प्रक्रिया पर अमल किया जा रहा है ।            आधिकारिक जानकारी के मुताबिक  पूरी प्रक्रिया इसी वर्ष अर्थात 2018 के अंदर पूरी कर ली जायेगी क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने एनआरसी का काम पूरा करने के लिए समय सीमा बढ़ने से इनकार कर दिया है

ऐसे बनेगा भारत भ्रष्टाचार मुक्त...!!

एक मशहूर हिंदी फिल्म का गाना है- “ जिसने पाप न किया हो , जो पापी न हो.. ”, यदि इसे हम अपने देश में भ्रष्टाचार के सन्दर्भ में मामूली फेरबदल के साथ कुछ इसतरह से लिखे - “ जिसने भ्रष्टाचार न किया हो , जो भ्रष्ट न हो.. ”, तो कोई अतिसयोंक्ति नहीं होगी क्योंकि हम सब भ्रष्ट है और हम में से कोई भी ऐसा नहीं होगा जो कभी भ्रष्टाचार में लिप्त न रहा हो. मेरी इस बात पर कई लोगों को आपत्ति हो सकती है और होनी भी चाहिए लेकिन यदि वे भ्रष्टाचार की सही-सही परिभाषा को समझ ले तो वे भी न केवल मेरी बात से सहमत हो जाएंगे बल्कि समाज को बदलने से पहले स्वयं को बदलने में जुट जाएंगे.  दरअसल भ्रष्टाचार का मतलब अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए किसी व्यक्ति द्वारा अधिकारों का दुरूपयोग करना या वित्तीय लाभ लेना भर नहीं है बल्कि नैतिक रूप से जो भी गलत है वह भ्रष्टाचार के दायरे में आएगा. मसलन आप से मिलने घर आए किसी व्यक्ति से मिलने से बचने के लिए पत्नी/बच्चे से यह कहलवाना कि आप घर में नहीं है , भी उसीतरह का भ्रष्टाचार है , जैसे दूध में पानी मिलाना या मिर्च-धने में व्यापारी द्वारा मिलावट करना. बिजली चोरी करना भी भ्रष्टाचार है

गरीब-अनपढ़ पेंगू ने मारा हिन्दू-मुस्लिम में बांटने वालों को तमाचा !!

आज के समय में जब खून के रिश्तों का मोल नहीं है,परिवार टूट रहे हैं , लोग अपनों तो दूर मां-बाप की भी जिम्मेदारी उठाने से बच रहे हैं और जाति-धर्म की दीवारें समाज को निरंतर बाँट रहीं हैं, ऐसे में किसी दूसरे धर्म के तीन अनाथ बच्चों को सहारा देना वाकई काबिले तारीफ़ है और वह भी तब इन तीन बच्चों में से दो विकलांग हों...लेकिन कहते हैं न कि यदि कुछ करने की चाह हो तो इंसानियत सबसे बड़ा धर्म बन जाती है और फिर यही भावना मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाने की ताकत देती है. कुछ ऐसा ही हाल पेंगू अहमद बड़भुइयां का है. मणिपुरी मूल के मुस्लिम पेंगू अहमद सिलचर फुटबाल अकादमी में चौकीदार हैं और अपनी सीमित आय में सिलचर से दूर गाँव में रह रहे अपने मूल परिवार में चार बच्चों का किसीतरह भरण पोषण करते हैं लेकिन इसके बाद भी इन अनाथ-बेसहारा बच्चों को अपनाने में उन्होंने जरा भी हिचक नहीं दिखाई. पेंगू के मानवता परिवार में सबसे पहले विष्णु शामिल हुआ. विष्णु के पैर जन्म से ख़राब हैं और जब वह छोटा ही था तभी मां चल बसी. इसके बाद विष्णु के पिता ने दूसरी शादी कर ली और जैसा कि आमतौर पर होता है कि सौतेली मां ने विकलांग बच्चे को नहीं