सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

सितंबर, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जन्मदिन मुबारक गूगल ‘गुरु’...

‘गूगल गुरु’ आज 18 साल के हो गए. वैसे तो 18 साल की आयु को समाज में परिपक्व नहीं माना जाता तभी तो न इस उम्र में आप शादी(पुरुष) कर सकते हैं और न ही शराब पी सकते हैं. यहाँ तक कि देश में चुनाव भी नहीं लड़ सकते,बस अपने जन-प्रतिनिधि का चुनाव कर सकते हैं. इस आयु के युवा औसतन बारहवीं कक्षा की पढाई पूरी कर कालेज में एडमीशन की ज़द्दो-जहद में लगे होते हैं, लेकिन गूगल गुरु की बात ही निराली है. गूगल ने अपने अठारह साल के सफ़र में पूरी दुनिया को अपना मुरीद बना लिया है. जो भी जानकारी चाहिए बस गूगल पर सर्च मारिए और पलक झपकते ही सभी जानकारियां पूरे विस्तार के साथ हाज़िर हो जाती है. गूगल ने ‘वर्चुअल गुरु’ बनकर वास्तविक गुरुओं को भी पीछे छोड़ दिया है. भले ही इस उम्र में शराब/सेक्स जैसी बातों से परहेज करना होता है लेकिन गूगल इसी आयु में शराब बनाने से लेकर पीने के तरीके तक बता रहा है. और सेक्स को तो इसने घर-घर( इसे मोबाइल-मोबाइल पढ़ें) में उपलब्ध करा दिया है. जैसा की मैंने ऊपर लिखा है कि सामान्य तौर पर इस आयु को परिपक्व नहीं माना जाता इसलिए हम यह मान सकते हैं कि गूगल गुरु पर सर्च भी अभी अपने अपरिपक्व दौर में

ये कैसा देशप्रेम है हमारा…..!!!

हाल ही में कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कर्नाटक के लोग विरोध में सड़कों पर उतर आए. दर्जनों बस जला दी गयी और कई सरकारी भवन/वाहन आग के हवाले के दिए गए. अब तो मानो यह रोजमर्रा की सी बात हो गयी है. जब भी किसी को किसी भी घटना/फिल्म/बयान/सरकार/फैसले से नाराजगी होती है तो वे सड़कों पर निकल पड़ते हैं और विरोध के नाम पर तोड़फोड़ करने लगते हैं. कभी कोई बस जलाएगा तो कभी सरकारी कार्यालय. कोई अपना गुस्सा सरकारी संपत्ति पर निकालेगा तो किसी की नाराजगी वहां खड़े वाहनों पर निकलेगी. मैं आज तक नहीं समझ पाया कि इस तोड़फोड़ से या सरकारी संपत्ति में आग लगाने से कौन सा विरोध जाहिर होता है? विरोध करना/नाराजगी जताना या किसी के खिलाफ प्रदर्शन करना हमारा लोकतान्त्रिक अधिकार है और जरुरत पड़ने पर ऐसा करना भी चाहिए ताकि किसी को भी निरंकुश होने या लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के खिलाफ जाने की हिम्मत न पड़े लेकिन सरकारी संपत्ति को जलाना या नुकसान पहुँचाना क्या लोकतान्त्रिक विरोध का हिस्सा है? सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि सरकारी संपत्ति किसकी है- सरकार की? बिलकुल नहीं और वैसे भी सरक