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कूड़ा नहीं ज़नाब, सोना कहिए सोना...!!!

एक विज्ञापन की चर्चित पंचलाइन हैं- “ जब घर में पड़ा है सोना तो फिर काहे को रोना ”,और आज लगभग यही स्थिति हमारे नगरों/महानगरों की है क्योंकि वे भी हर दिन जमा हो रहे टनों की मात्रा में कचरा अर्थात सोना रखकर भी रो रहे हैं। इसका कारण शायद यह है कि या तो उनको ये नहीं पता कि उनके पास जो टनों कचरा है वह दरअसल में कूड़ा नहीं बल्कि कमाऊ सोना है और या फिर वे जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं? अब यह पढ़कर एक सवाल तो आपके दिमाग में भी आ रहा होगा कि बदबूदार/गन्दा और घर के बाहर फेंकने वाला कूड़ा आखिर सोना कैसे हो सकता है? इस पहेली को सुलझाकर आपका आगे पढ़ने का उत्साह ख़त्म करने से पहले हम इस बात पर चर्चा करते हैं कि सही तरह से निपटान की व्यवस्था नहीं होने के कारण कैसे आज कचरा हमारे नगरों/महानगरों और गांवों के लिए संकट बन रहा है। दिल्ली में रहने वाले लोगों ने तो गाज़ियाबाद जाते समय अक्सर ही कचरे के पहाड़ देखे होंगे। ऊँचे-ऊँचे एवं प्राकृतिक पर्वत मालाओं को भी पीछे छोड़ते कूड़े के ढेर,उनसे निकलता जहरीला धुंआ और उस पर मंडराते चील-कौवे। ये पहाड़ शहर का सौन्दर्य बढ़ाने के स्थान पर काले धब्बे की तरह नज़र आते हैं जो

भारतीय नौसेना:समुद्री सरहद की अभेद दीवार

किसी भी लोकतान्त्रिक देश के अनवरत विकास और सतत प्रगति के लिए मौजूदा दौर में सामाजिक और आर्थिक मापदंडों के साथ साथ सुरक्षा का पहलू भी एक महत्वपूर्ण कारक है क्योंकि सुरक्षित सीमाओं और मजबूत सरहदों के बिना प्रगति के पथ पर चलना आसान नहीं है. हमारे देश का सुरक्षा ढांचा भूत-वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के मद्देनजर तैयार किया गया है इसलिए इसमें ज़मीनी सरहद से लेकर हवा और पानी तक में सुरक्षा के लिए अलग अलग अंगों को दायित्व सौंपे गए हैं. जिन्हें हम मोटे तौर पर  थल सेना , वायु सेना और नौ सेना के नाम से पहचानते हैं. देश में लगभग चौतरफा फैली सामुद्रिक सीमाओं की सुरक्षा का दायित्व भारतीय नौसेना बखूबी संभाल रही है. दरअसल जमीन पर तो रेखाएं खींचकर और बाड़ इत्यादि लगाकर सरहद की देखभाल की जा सकती है लेकिन समुद्र में तो आसानी से कोई सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती इसलिए हमारी नौसेना का काम सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है. चूँकि दुनियाभर में समुद्री परिवहन और व्यापार में इजाफा हो रहा है और समद्र अब आर्थिक विकास का माध्यम बन रहे हैं इसलिए देश के जलीय क्षेत्र और विशेष रूप से हिन्द महासागर क्षेत्र में हमार

नौसेना में महिलाओं ने लगाए चार चाँद

‘नविका सागर परिक्रमा’ भारतीय नौसेना का एक ऐसा अद्भुत नौ-परिभ्रमण  अभियान है जिसमें सभी महिला सदस्य शामिल हैं.  यह दुनिया में अपनी तरह का पहला रोमांचक  नौकायन अभियान है. नौसेना में  रोमांच और साहस की भावना को बढ़ावा देने के लिए शुरू हुआ यह अभियान लगभग 165 दिनों में दुनिया भर का चक्कर लगाकर अप्रैल 2018 में गोवा वापस लौटेगा. रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 10 सितंबर , 2017 को गोवा से इस अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था । आईएनएसवी तरिणी पर विश्‍व भ्रमण पर निकले इस दल की कैप्‍टन लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी है और इसके चालक दल में लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवल , पी . स्‍वाति और लेफ्टिनेंट एस विजया देवी , वी ऐश्‍वर्या तथा पायल गुप्‍ता शामिल हैं।   स्‍वदेश में निर्मित आईएनएसवी तरिणी 55 फीट का नौकायन पोत है , जिसे इस वर्ष की शुरूआत में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। इससे अंतर्राष्‍ट्रीय मंच पर ‘ मेक इन इंडिया ’ पहल को दर्शाया जा रहा है। ‘ नविका सागर परिक्रमा ’ नाम का यह अभियान महिलाओं की अंतर्निहित ताकत के जरिए उनके सशक्तिकरण की राष्‍ट्रीय नीति के अनुरूप ह

आसान नहीं है पूर्वोत्तर में पीआर..!!

पूर्वोत्तर का नाम लेते ही हमारे सामने हरियाली से भरपूर और वरुण देवता की मेहरबानी से सराबोर ऐसे क्षेत्र की तस्वीर सामने आ जाती है जिसे शायद प्रकृति का सबसे अधिक लाड़ एवं दुलार मिला है । यहाँ आसमान छूने की होड़ करते बांस के जंगल हैं तो घर-घर में फैले तालाबों में अठखेलियाँ करती मछलियाँ । देश के दूसरे राज्यों से यह ‘अष्टलक्ष्मी’ इस मामले में अलग है कि यहाँ धरती के सीने पर गेंहू और चने की फसलें नहीं बल्कि कड़कदार चाय की पत्तियां लहलहाती है और ऊँचे ऊँचे बांस के जंगल इठलाते हैं । यहाँ की धरती कभी अपनी बांहों में पानी समेटकर धान सींचती है तो कहीं मछलियों के लिए तालाब बन जाती है । पूर्वोत्तर अपनी अद्भुत कला और हस्तशिल्प की एक समृद्ध विरासत के लिए भी जाना जाता है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी यहाँ अब तक निखर रही है । भौगोलिक-सामाजिक परिदृश्य दरअसल किसी भी क्षेत्र में जनसंपर्क की संभावनाएं,स्थिति और चुनौतियों को समझने के लिए उस क्षेत्र की भौगोलिक,सांस्कृतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि को जानना भी उतना ही जरुरी है ताकि विषय को समझने में आसानी हो । ऐतिहासिक और समकालीन आयामों की समग्र समझ हासिल करने के बाद