गुरुवार, 11 जून 2015

मोबाइल खोलेगा घर घर में आईआईएम-आईआईटी जैसे नामी शिक्षा संस्थान

इन दिनों छोटे परदे पर प्रसारित हो रही दूरसंचार सेवा प्रदान करने वाली एक निजी कम्पनी की विज्ञापन श्रृंखला टीवी के साथ साथ सोशल मीडिया पर काफी चर्चित है. रचनात्मक दृष्टि से उत्तम इस विज्ञापन श्रृंखला में उस कम्पनी की मोबाइल इंटरनेट सेवा को किसी विश्वविद्यालय या आईआईएम-आईआईटी जैसे नामी शिक्षा संस्थान की तरह दर्शाया गया है और उस कंपनी के ग्राहक अंग्रेजी सीखने से लेकर हवाई जहाज चलाने और वाहन सुधारने जैसे काम भी मोबाइल कंपनी द्वारा सृजित छदम शैक्षणिक संस्थान से सीखते दर्शाए गए हैं. ये तो रही विज्ञापन की बात परन्तु अब हक़ीकत में भी ऐसा कुछ होने जा रहा है और वो भी सरकारी स्तर पर. फिलहाल यह तो खोज का विषय हो सकता है कि सरकार ने इस कंपनी के विज्ञापनों से प्रेरणा ली है या फिर सरकारी योजना से प्रेरणा लेकर और सरकार में काम की जगजाहिर धीमी रफ़्तार का फायदा उठाकर दूरसंचार कम्पनी ने पहले विज्ञापन शुरू कर दिए. बहरहाल सच्चाई जो भी हो लेकिन इस प्रयास से शिक्षा क्षेत्र में क्रांति आ सकती है.  
दरअसल मानव संसाधन विकास मंत्रालय मंत्रालय देश के पूर्वोत्तर राज्यों और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में आम लोगों तक गुणात्मक शिक्षा की उपलब्धतता को सुनिश्चित करने के लिए केन्द्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी,आईआईएम और एनआईटी जैसे श्रेष्ठतम शिक्षा संस्थानों के सभी डिप्लोमा और कुछ डिग्री पाठ्यक्रमों को देश के सभी नागरिकों को लगभग मुफ़्त में उपलब्ध कराना चाहता है. इस योजना के अंतर्गत आम लोगों को अपने मोबाइल फोन के जरिये मात्र 500 रुपए में देश के इन नामी संस्थानों में पढने,परीक्षा देने और उत्तीर्ण होने का प्रमाणपत्र हासिल करने की सुविधा मिल जाएगी. इसके लिए देशभर में दूरसंचार सेवाओं से सुसज्जित ऐसे 500 केन्द्रों की पहचान की जा रही है जहाँ इन पाठ्यक्रमों से सम्बंधित पढाई और परीक्षा देने की सुविधा मिलेगी.
मानव संसाधन विकास मंत्रालय की मुखिया स्मृति ईरानी ने खुद यह बात हाल ही में पूर्वोत्तर के अपने पहले दौरे के समय पत्रकारों को बतायी. ईरानी का कहना था कि उनका मंत्रालय इसीतरह की कुछ अनूठी योजनाओं पर काम कर रहा है. इन योजनाओं पर अमल से स्कूली शिक्षा ही नहीं बल्कि उच्च शिक्षा भी मोबाइल फोन पर उपलब्ध हो जाएगी और इसका सबसे अधिक फायदा पूर्वोत्तर के राज्यों और इसीतरह के पिछड़ेपन के शिकार अन्य क्षेत्रों के लोगों को होगा.
मानव संसाधन मंत्रालय ने एक मोबाइल ऐप तैयार इसकी शुरुआत भी कर दी है. इस ऐप की मदद से कक्षा पहली से लेकर बारहवीं तक पढाई जाने वाली एनसीआरटीई की सभी पुस्तकें मोबाइल फोन में मुफ़्त डाउनलोड की जा सकेंगी. इससे दूर दराज के इलाकों के बच्चों के सामने समय पर पुस्तकें नहीं मिल पाने की समस्या नहीं रहेगी. इंटरनेट के मामूली शुल्क पर पुस्तकें मिल जाने से अमीर-गरीब सभी परिवारों के बच्चों को न तो हर साल किताबें खरीदनी पड़ेगीं, न ही उन्हें सहेजकर रखने का झंझट होगा और न ही फिर हर दिन बोरे जैसे बस्ते को ढोकर स्कूल ले जाना पड़ेगा बल्कि एक फोन उनका जीवन में पढाई को आसान कर देगा. यह ऐप जल्द जारी होने की सम्भावना है. यही नहीं, दूसरे चरण में अर्थात् दो-तीन माह के भीतर मंत्रालय इसी श्रृंखला का दूसरा ऐप जारी करेगा. यह दूसरा ऐप पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को इन पुस्तकों पढ़ने और उनके शिक्षकों को इन पुस्तकों से पढ़ाने का तरीका सिखाएगा. इसका तात्पर्य यह हुआ कि देश की समूची स्कूली शिक्षा महज एक मोबाइल फोन में समा जाएगी.

सोचिए, भविष्य में उच्च शिक्षा कितनी सहज,सरल और सस्ती हो जाएगी. घर घर में मोबाइल फोन की तरह आईआईएम-आईआईटी जैसे ‘इलीट’ शिक्षा संस्थानों के डिप्लोमा-डिग्री धारी मिलने लगेंगे और शिक्षा में इन दिनों बन रही अमीर-गरीब,ऊँच-नीच जैसी बुराइयों को जड़ से ख़त्म करने में मदद मिलेगी. सबसे अहम बात तो यह है कि 10 करोड़ से ज्यादा मोबाइल फोन ग्राहकों के फलस्वरूप सभी को शिक्षा देने का संकल्प भी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के पूरा किया जा सकेगा. योजना देखने,सुनने,पढने में तो अच्छी लगती है लेकिन यह तो अमल के बाद ही पता चल पायेगा कि जमीनी स्तर पर ये कितनी कामयाब हो पाती हैं और तब तक घर बैठे आईआईएम-आईआईटी में पढ़ने के अपने सपने को जीवित रखिए.

2 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, नहीं रहे रॉक गार्डन के जनक - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. वाह...अच्‍छी योजना है पर जमीन पर उतरे और सफल हो तब न..

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