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मुलाक़ात एक अनूठे-अद्भुत और सबसे अलग महामंडलेश्वर से

 प्रयागराज कुंभ: जैसा मैंने देखा (5)                     
प्रथम गेट से लेकर मुख्य पंडाल तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है, कुछ बाहुबली लोग भीड़ को सँभालने में जुटे हैं. मुख्य पंडाल भी खचाखच भरा है- नेता,अभिनेता,मीडिया और साधु-संतों सहित तमाम लोगों को महामंडलेश्वर का इंतज़ार है. किसी तरह जुगाड़ लगाकर अन्दर तक पहुंचकर हमने भी पूछा तो बताया गया कि महामंडलेश्वर तैयार हो रहे हैं तथा अभी उन्हें डेढ़ घंटा और लगेगा...यह सुनकर हमारा चौंकना लाज़िमी था. आखिर किसी संत को तैयार होने में इतना समय कैसे लग सकता है ! लेकिन जब बात किन्नर अखाड़े के श्री अनंत विभूषित आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण जी त्रिपाठी (जैसा उनके भक्त कहते हैं) की हो तो फिर इतना समय तो लगना वाजिब है.
ऐसा भी नहीं है कि महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी(वहीँ जिन्हें अब तक हम सभी लक्ष्मी के नाम से पहचानते थे) पंडाल में उतावले लोगों से अनजान हैं. वे अन्दर से ही हस्तक्षेप कर लोगों को अनावश्यक चर्चा से बचने की सलाह देती हैं. बीच बीच में, उनके खांसने की आवाज़ भी आती है और उनके प्रबंधक बताते हैं कि स्वामी जी की तबियत ठीक नहीं हैं.
बहरहाल, लम्बे इंतज़ार और भारी भीड़ के कारण उमस और गर्मी से हो रही उकताहट को ख़त्म कर महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी हमारे बीच आती हैं. वे पहले से सज्जित एक सिंहासन नुमा आसन पर बैठकर मिलना शुरू करती हैं. उनके श्रृंगार से पता लग जाता है कि उन्हें इतना समय क्यों लगा. हम चूँकि मीडिया से थे इसलिए हमें तुलनात्मक रूप से पहले मिलने का मौका मिल जाता है और प्रसाद के रूप में कुछ सिक्के,रुद्राक्ष भी. हमारे एक साथी बताते हैं कि बुधवार(जिस दिन हम मिले) को किसी भी किन्नर से यह प्रसाद मिलना बड़ा फलदायक होता है. पत्रकारीय आदत के चलते मैंने आग्रह किया कि एक फोटो खींच लें तो लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने मोबाइल तुरंत अपने हाथ में ले लिया और फिर मंझे हुए अंदाज में शानदार सेल्फी ले डाली. इसी बीच स्थानीय के अलावा कई विदेशी चैनल भी उनसे बातचीत के लिए आतुर थे और उनके मुरीदों की भीड़ भी कम होने का नाम नहीं ले रही थी इसलिए हम भी वहां से निकलकर उनके अखाड़े का जायजा लेने में जुट गए. अन्य अखाड़ों की तरह किन्नर अखाड़े में भी एक यज्ञशाला और श्रद्धालुओं के लिए स्वादिष्ट भोजन का प्रबंध था और पूरे परिसर में अखाड़े के अन्य संत-महंतों के टेंट और महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के अलग अलग आकर्षक पोस्टर थे.
ट्रांसजेंडर (थर्ड जेंडर) अधिकारों के लिए काम करने वाली लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को उज्जैन सिंहस्थ में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर घोषित किया गया. बताया जाता है कि देश के लगभग 20 लाख किन्नरों की सर्वसम्मति से उन्हें इस पद के लिए चुना गया है. इस बार भी वे तमाम विरोध के बाद भी न केवल प्रयाग कुंभ में अपना अखाड़ा ज़माने में कामयाब रहीं बल्कि उनके अखाड़े में बढ़ती भीड़ ने उन्हें यहाँ रुकने पर मजबूर कर दिया. आमतौर पर सभी अखाड़े अंतिम शाही स्नान के बाद कुम्भ से विदा हो गए थे लेकिन किन्नर अखाड़ा महाशिवरात्रि तक यहीं था.
लक्ष्मी पहले भी बताती रहीं है कि किन्नर अखाड़े को महाकुंभ का हिस्सा बनाने के पीछे उनकी मंशा किन्नरों को समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिलाने की है.उनका मानना है कि जब हर कोई हमसे आशीर्वाद और दुआ लेता है तो समाज में किन्नरों के लिए सम्मानजनक स्थान क्यों नहीं होना चाहिए ? अपने समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली तेजतर्रार लक्ष्मी को अपने किन्नर होने पर गर्व है ।
लक्ष्मी पहली किन्नर हैं जो संयुक्त राष्ट्र में एशिया प्रशांत क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और अपने समुदाय और भारत का प्रतिनिधित्व टोरंटो में विश्व एड्स सम्मेलन जैसे अनेक मंचों पर कर चुकी हैं । वह इस समुदाय के समर्थन और विकास के लिए अस्तित्व नाम का संगठन भी चलाती है । लक्ष्मी बिगबॉस सीजन 5 की प्रतिभागी भी रह चुकी हैं । टीवी शो "सच का सामना", "दस का दम" और "राज पिछले जनम का" में भी उन्हें देखा गया था ।
लक्ष्मी आम किन्नरों की तरह नहीं हैं जो मज़बूरी के कारण इस समुदाय का हिस्सा हैं बल्कि वे बिलकुल अलग हैं. लक्ष्मी का जन्म महाराष्ट्र के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उन्होंने मीठीबाई कॉलेज से आर्ट्स में डिग्री ली और भरतनाट्यम में स्नातकोत्तर भी किया है. वे कुशल वक्ता,अभिनय और नृत्य में निपुण, अपने अधिकारों को लेकर जागरूक मुखिया और शून्य से शिखर तक पहुँचने वाली योद्धा हैं जिन्होंने अपने बलबूते यह मक़ाम हासिल किया है साथ ही अपने परिवार और समुदाय को भी समाज में प्रतिष्ठा दिलाई है. उनकी यही खूबियाँ हम जैसे कई लोगों को उनका प्रशंसक बनाती हैं और यही प्रशंसा उन तक खीच ले जाती है, फिर चाहे मिलने के लिए दो घंटे इंतज़ार ही क्यों न करना पड़े ....तो आइए हम भी उनके आसपास जमा सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ सम्मान से कहें- श्री अनंत विभूषित आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण जी त्रिपाठी, आपका स्वागत है और आपके ज़ज्बे को हमारा सलाम.
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