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चुटकियों में जिंदगी का फ़लसफ़ा समझाती रोचक किस्सागोई

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कुछ किताबें ऐसी होती हैं जो बिना किसी गूढ़ और अलंकृत भाषा के भी जीवन के अहम फलसफे आसानी से समझा देती हैं। बिल्कुल परिवार के उस सदस्य की तरह  जो बच्चों से लेकर बड़ों तक के बीच हल्के फुल्के अंदाज में अपनी बात कह जाता है। वरिष्ठ लेखक एवं संचार विशेषज्ञ संजय सक्सेना एवं उनकी नई किताब ‘डायरी का आखिरी पन्ना’ भी परिवार के सदस्य की तरह है जो बिना लाग लपेट के जरूरी संदेश दे जाती है लेकिन अंदाजे बयां ऐसा है कि आप मुस्कराते हुए उस संदेश को आत्मसात कर सकते हैं। ‘डायरी का आखिरी पन्ना’ न केवल बिना किसी बनावटीपन के आपको ज़िंदगी की सच्चाई से रूबरू कराती हैं बल्कि यह किताब आपको अपनी डायरी खोलकर कोई संदेश, कोई सबक या बस एक ईमानदार एहसास जैसा कुछ न कुछ लिखने के लिए प्रेरित भी करती है। ‘डायरी का आखिरी पन्ना’ वास्तव में रोज़मर्रा की ज़िंदगी के उन छोटे-छोटे किस्सों का संग्रह है, जो सतह पर साधारण लगते हैं, लेकिन गहराई में जीवन के गहरे संदेश छिपाए हुए हैं। यह किताब ठीक उसी तरह है जैसे हमारी अपनी डायरी का आखिरी पन्ना…जहाँ हम वे सभी बातें लिखते हैं जो कहीं और नहीं लिख पाते, जो सच्ची, ईमानदार और बिना किसी फि...