‘इमोजी’…मतलब भाव ने भाषा की छुट्टी कर दी..!!
विश्व इमोजी दिवस यानी उन पीले-पीले गोल चेहरों का दिन, जिन्होंने दुनिया की हजारों भाषाओं को चुनौती दे दी है। यह दिन हाल ही में मनाया गया। जब दिन है तो उस पर चर्चा भी जरूरी है और इस विषय पर बातचीत तो इसलिए भी होनी चाहिए क्योंकि भाव पर आधारित ये चंद चित्रों ने भाषा की छुट्टी करने के लिए कमर कस ली है। कभी शब्दों के सहारे रिश्ते बनते थे, अब एक 😊, 😍, 😡 या 👍 तय कर देता है कि सामने वाला खुश है, नाराज़ है या केवल औपचारिकता निभा रहा है। किसी समय हम सभी चिट्ठी में लिखते थे कि “प्रिय मित्र, तुम्हारा पत्र पाकर हृदय गदगद हो उठा।” आज इस भाव को एक ❤️ में समेट दिया गया है। कभी किसी की उपलब्धि पर हम खुलकर लिखते थे कि “हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ।” अब बस... 🎉👏और काम खत्म। अब तो ऐसा लगने लगा है कि भाषा पुस्तकों/शब्दकोश/अखबारों में कैद हो गई है और बातचीत इमोजी कीबोर्ड पर आ बसी है। सोशल मीडिया में तो बिना इमोजी के गुजारा ही नहीं है। सारा सुख-दुख बस चंद कार्टून नुमा चेहरों में सिमट गया है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इमोजी ने उम्र का, अनुभव का,रिश्तों का अंतर भी लगभग मिटा दिय...