देवभूमि के बाग़ में (सफेद) दुशाला ओढ़े खड़ी है..!!
क्वीन ऑफ हिल्स शिमला के साथ साथ देवभूमि हिमाचल में नए साल की आज 23 जनवरी ने लोगों की खोई मुस्कान वापस लौटा दी है। यह एक ऐसा दिन है जब आसमान ने अपनी पुरानी डायरी के पन्ने पलटे और सफ़ेद स्याही से नया अध्याय लिखना शुरू कर दिया..ऐसा अध्याय जिसे हर कोई पढ़ना चाहता है..स्थानीय लोग, पर्यटक, होटल व्यवसाई और स्वयं प्रकृति भी।
सुबह-सुबह जब लोगों की आँखें खुलीं, तो उनकी खिड़की के शीशे पर कोई अनजान बच्चा उँगली से दिल नहीं बना रहा था—बल्कि बादल खुद बर्फ के छोटे-छोटे चमकदार सफेद टुकड़े बिखेर रहे थे। शहर का मशहूर रिज मैदान (आम लोगों के लिए मॉल रोड), जो कल तक धूप में अपनी पुरानी कॉलर वाली कोट पहने उदास सा था, आज सुबह-सुबह एकदम सफ़ेद शॉल ओढ़े खिलखिला रहा था—जैसे कोई देवदूत या परी सफेद दुशाला ओढ़े आ गई है और सबकी नज़रें उसी पर टिक गई हों।
मॉल रोड पर आज बर्फ़ के बीच चाय की केतली से अदरक-इलायची की खुशबू ज्यादा मनमोहक लग रही है। स्कूटर, कार और घरों की लाल-हरी छतों ने जगमग सफेदी भरा दुपट्टा ओढ़ लिया है । बर्फ़ की ठंडक पाकर कई वाहन चैन की नींद सो रहे हैं और मालिक से शायद फुसफुसाकर कह भी रहे हैं.. "अरे पहले मेरी सफेद चादर तो हटाओ!" सड़कें पर चुपचाप पर्यटकों के स्वागत के लिए व्हाइट कार्पेट बिछ गया है—जैसे कोई शायर कह गया हो कि सफेदी की ख़ामोशी भी कभी इतनी सुंदर हो सकती है।
मनाली,कुफ़री, ठियोग और नारकंडा तो पहले से ही तैयार बैठे थे— स्कूल के उन पढ़ाकू बच्चों की तरह जो एग्ज़ाम से पहले ही किताब खोलकर सिलेबस पूरा कर बैठ जाते हैं लेकिन शिमला शहर की संगत ने उनको कुछ बरगला दिया था और क्वीन ऑफ हिल्स ने सूखे में उनका नेतृत्व भी किया। तीन महीने तक सिलेबस से बाहर सूखे मौसम को पढ़ने पर मजबूर कर दिया। लोगों को बारिश बर्फबारी के लिए भरपूर इंतज़ार करवाया। यहां तक कि स्थानीय लोगों के साथ साथ पर्यटकों को यह पूछते पूछते थका दिया था कि "कब आएगी बर्फ?"...और फिर एकदम से इतनी बर्फ उड़ेल दी—जैसे कोई हीरो लास्ट सीन में एंट्री मारता है या वैसे ही जैसे लास्ट बॉल पर सिक्स मारकर कोई बल्लेबाज टीम को जिता देता है।
प्रकृति ने यह खेल इतनी खूबसूरती से रचा कि सब का गुस्सा काफूर हो गया । पर्यटक अब फोटो खींच नहीं रहे, बल्कि फोटो में खुद को बर्फ के साथ समेटने की कोशिश कर रहे हैं। बच्चे बर्फ़ में लोट-पोट होकर स्नोबॉल बना रहे हैं, और रोमांटिक जोड़े हाथ में हाथ डाले एक दूसरे को निहार रहे हैं—जैसे बर्फ़ ने उन्हें रोमांस एवं गर्मजोशी से भर दिया हो। यह बर्फ सिर्फ़ ठंड नहीं लाई, एक तरह की सामूहिक स्मृतियां भी समेट लाई है। सब कुछ इस सफ़ेद चादर के नीचे से फिर से जीवित हो उठा है।शिमला आज फिर वही पहाड़ों की पुरानी रानी बन गई है— अब उसने सफ़ेद गाउन पहन लिया है, और आसमान उसके लिए बार-बार फूल बरसा रहा है। तो अगर आप भी ठिठुरते हुए कहीं गर्म कम्बल में बैठे हैं, तो एक बार खिड़की खोलकर देखिए—कहीं शिमला की बर्फ़ आपकी तरफ़ भी कोई छोटा-सा संदेश तो नहीं भेज रही? और हाँ, अगर मॉल रोड पर हैं तो हाथ में गरमागरम चाय का एक गर्म प्याला ज़रूर थाम लीजिए क्योंकि इससे बर्फ़ देखने का मज़ा दोगुना जाएगा..आखिर, गर्म हाथ ही तो दिल की गर्मजोशी का मार्ग प्रशस्त करते हैं ।
परामर्श: यह खूबसूरत दृश्य महसूस करने के लिए मुकम्मल तैयारी रखिए..गर्म कपड़े, जूते, छाता वगैरह और हां, बर्फ की फिसलन से जरूर बचिए क्योंकि दिल की फिसलन की तरह बर्फ की फिसलन भी ऐसे गहरे दर्द दे जाती है तो सालों साल इस सीजन की याद दिलाते हैं।



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