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मेरी माँ .....मम्मा





शुरुआत दो अलग अलग तेवरों वाले उदाहरणों से ...

प्रथम :एक बार स्वामी विवेकानंद से किसी ने पूछा कि हमेशा माँ को इतना महत्त्व क्यों दिया जाता है तो उन्होंने उस व्यक्ति दे कहा कि ये दो किलो का पत्थर लो और इसे अपने पेट पर बांधकर शाम तक घूमों.जब तुम वापस आओगे तब मैं इसका उत्तर दूँगा.शाम को जब वह व्यक्ति वापस आया तो उसकी हालत खराब थी उसने कहाँ स्वामीजी आपकी शर्त ने तो मेरे प्राण ही निकल दिए तब विवेकानंद ने कहाँ सोचो यदि इस भार  के साथ दिन भर में तुम्हारी हालत खराब हो गई तो तुम्हारी माँ ने तो इस भार  को पूरे नौ माह तक खुशी –खुशी बर्दाश्त किया है इसलिए माँ कि महानता को सबसे ऊंचा दर्ज़ा हासिल है.

द्वितीय:एक अँगरेज़ से भारतीय ने पूछा कि मेरे तीन भाई बहन हैं ,तुम्हारे कितने भाई-बहन हैं तो अँगरेज़ ने उत्तर दिया एक भी नहीं परन्तु मेरी एक माँ से चार पिता और मेरे पहले पिता से पांच माँ ज़रूर हैं .

ये दोनों उदाहरण दो भिन्न भिन्न संस्कृतिओं को अभिव्यक्त करते हैं.इसलिए भले ही मदर डे कि शुरुआत पश्चिमी देशों से हुई हो लेकिन इसका महत्त्व हम भारत वासी ही जानते हैं.भारत से याद आया कि भारत कुमार के नाम से चर्चित अभिनेता मनोज कुमार ने तो अपनी एक फिल्म में बकायदा गीत के ज़रिए माँ का महत्त्व बताया है.याद है वो मशहूर पंक्तियाँ जिनमें उन्होंने बताया था कि हमारे देश में नदियों को भी माता कहकर बुलातें हैं.वाकई हम गंगा को गंगा माँ ही तो कहतें हैं और कहें भी क्यों न जब वो हमारी पूरी गंदगी  को अपने में समाहित कर लेती है.दरअसल माँ भी तो यही करती है हमारी सारी गलतियों को माफ कर हमें अपने आँचल की छाँव  प्रदान करती है.तो हुई न माँ सबसे महान.मदर डे के बहाने ही सही क्यों न माँ के लाड़-प्यार,मनुहार,मीठी लोरिओं,प्यार से पगी बोलियों और स्वादिष्ट भोजन को याद कर लें.माँ के इस क़र्ज़ को चुकाना तो नामुमकिन है फिर भी उसकी खुशी कि खातिर कम से कम एक दिन के लिए ही हम अपना आडम्बर,दिखावा और बड़े हो जाने का एहसास त्याग दें और फिर उसके आँचल का सहारा ले लें .शायद इससे माँ को जो खुशी मिलेगी वह खुशी उसे हम मॉल कि मंहगी साड़ी,इत्र और नकलीपन से भरे वातावरण में खाना खिलाकर भी नहीं दे सकते.

माँ के बारे में मशहूर शायर मुनव्बर राणा ने लिखा है:

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती

बस एक माँ है जो मुझसे खफा नहीं होती

मेरी ख्वाहिश है कि में फिर से फरिश्ता हो जाऊँ

माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि फिर से बच्चा बन जाऊँ

टिप्पणियाँ

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे 09.05.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
    http://charchamanch.blogspot.com/

    जवाब देंहटाएं
  2. blog ki dunia mein tumhe dekh kr umda lga,lekin jugaali naam jcha nhi.halanki tumahre lihaaj se chal skta hai. umeed kroon ki jugaali mein beete hue anubhon ka imandaari se jikr hoga.SMS aur TIPPNI mein mera dhyan rkh lete ho TKS

    जवाब देंहटाएं

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