प्रेम तो भावनात्मक अहसास है, दिखावा नहीं…!!

 


प्रिय

ओशो के अनुसार, सच्चा प्रेम स्वतंत्रता है, न कि बंधन या स्वामित्व। उनका मानना था कि प्रेम एक अवस्था है। आप प्रेम में होते नहीं, बल्कि आप प्रेम होते हैं। जो भयमुक्त और साझा करने की भावना पर आधारित है। प्रेम, जीवन को सुंदरता और अर्थ देता है। भले ही यह बात ओशो ने कही है लेकिन तुम भी यह बात बखूबी जानती हो कि हमारा परस्पर प्यार या प्रेम भी एक अनूठा एहसास है, जो दिमाग से नहीं दिल से है और इसमें अनेक भावनाओं और अलग अलग विचारों का समावेश है। जाहिर सी बात है, आप जिससे प्यार से जुड़ जाते हैं उसका प्रेम स्नेह से लेकर खुशी के शिखर तक अपने आप पहुंचने लगता है। प्यार एक मजबूत आकर्षण और परस्पर जुड़ाव की भावना है जो सब भूलकर साथ साथ जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित करती है..जैसे की हम । मेरा मानना है कि सच्चा प्यार वह होता है जो सभी हालातों में आप के साथ हो, यानी दुख में भी और सुख में भी.. आप को और आप की खुशियों और परेशानियों को अपनी खुशियां या दुख माने… जैसे मेरा और तुम्हारा प्यार। 

मनीषा, तुम मेरी पत्नी भर नहीं हो बल्कि दो दशकों से ज्यादा से मेरी हम कदम हो । प्यार का मतलब हमारे लिए सिर्फ यह नहीं कि फिल्मी दिखावे की तरह हम हमेशा साथ रहे, प्यार तो एक-दूसरे से दूर रहने पर भी बढ़ता है। हम पारिवारिक और कार्यालीन जिम्मेदारियों और उत्तरदायित्व के कारण भले ही कभी कभी दूर रहते हों लेकिन अहसास हमेशा परस्पर साथ होने के ही रहते हैं। हमारे प्रेम में ऐसी पॉजिटिव एनर्जी है जो हमें सदैव मानसिक और आंतरिक दोनों तरह की खुशी प्रदान करती है।

आज के वैलेंटाइन डे और जेन जी वाले दौर की पीढ़ी के लिए पति पत्नी के तौर पर 26 साल का समय आश्चर्य में डाल सकता है क्योंकि उनका प्यार तो हफ्ते,पखवाड़े और कुछ महीनों में मुरझाकर सूख जाता है। लेकिन हमारे लिए, ढाई दशक से भी ज्यादा का समय, ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात है। 


दरअसल, हमें कभी अहसास ही नहीं हुआ कि एक दूसरे का हाथ थामे हमने 26 साल पूरे कर लिए हैं। याद है न, (वैसे तुम्हें तो मुझसे ज्यादा याद रहता है)  23 नवम्बर 1999 को हमने साथ साथ चलना शुरू किया था। इतने अन्तराल के बाद आजकल अमूमन जोड़े एक दूसरे के विरुद्ध शिकवा-शिकायतों का पिटारा खोले बैठे रहते हैं लेकिन शायद परस्पर प्रेम, विश्वास और आपसी समझ ही है कि हमें ऐसा लगता ही नहीं है कि हम इतने सालों से 'विवाहित' हैं उल्टा आज भी 'हनीमून पीरियड' सा अहसास होता है। 

आम जोड़ों की तरह रोज़मर्रा की कोई शिकवा शिकायत नहीं, कभी कभार चंद मिनटों की नाराजगी और मनीषा जी, आपके मुख-मंडल पर हमेशा छाई रहने वाली बेफिक्र सी, प्यारी और स्नेहिल मुस्कान सारे गिले शिकवे/परेशानियाँ निकाल बाहर फेंकती है.... आज लगभग 50 साल से अधिक की आयु के साथ बढ़ते कदमों के बाद भी यदि अपना बनाव-ठनाव या चेहरे पर कुछ नमक बाकी है तो इसका श्रेय भी आप के प्यार को ही जाता है।

ऐसा नहीं है कि हमारा यह प्रेमिल गठबंधन एक दिन में बन गया बल्कि हमने इसे अपने भाव, भावनाओं, स्नेह, प्यार, एक दूसरे के साथ, सहयोग और अपने पन से सींचकर धीरे धीरे मजबूत वट वृक्ष बनाया है..ऐसा वृक्ष जिसे जीवन का कोई झंझावात हिला तक नहीं सकता। इसमें सबसे बड़ा योगदान आपका है क्योंकि अपने से बढ़कर दूसरों ख्याल रखना और मीठी से मुस्कराहट से आगे बढ़कर सबका ध्यान रखना, तुम्हारी खूबी है। शायद जीजी (मां) को इसका अहसास हमारी शादी के तुरंत बाद ही हो गया था तभी उन्होंने आप को नया नाम 'मुस्कान' दे दिया था...।


मनीषा जी, आपको अर्धांगिनी कहना सही शब्द नहीं है क्योंकि आप तो पूर्णांगनी हो... सब कुछ सम्पूर्ण करने वाली... मुझे, मेरे व्यक्तित्व को, हमारे परिवार को, खुशियों को, रिश्तों को और संबंधों को अपने प्रेम एवं स्नेह से साल दर साल नई गरमाहट देती आ रही हो। आप मेरे अधूरे वाक्य को पूरा करने वाला पूर्ण विराम हो लेकिन भाषा में पूर्ण विराम के बाद वाक्य खत्म हो जाता है जबकि मनीषा जी आप अपने प्रेम से उसे दोगुना कर और जीवंत कर देती हो । 

प्रिय, तुम सकारात्मकता और सहजता की ऊर्जा से सराबोर हो.. अपने मीठे स्वभाव और बड़े दिल के साथ सबको अपना बनाने में माहिर हो, रिश्तों की कद्रदान हो और सबसे जरूरी हर कदम पर, हर उत्सव को और हर छोटी से छोटी उपलब्धि को भी पूरे परिवार के साथ 'सेलिब्रेट' करने की भावना से सराबोर हो। 

प्रेम की पगडंडी पर इस शानदार सफर में हम परस्पर प्रेम से एक दूसरे के लिए उत्प्रेरक बनकर अपनी ऊर्जा और पॉजिटिविटी को दोगुना करने में कामयाब रहे हैं।.. ईश्वर की कृपा और परिवार के स्नेह /आशीर्वाद से आप की यह सौम्यता / सहजता / मुस्कान और हर एक के जीवन में सहयोगी बनकर खुशियां बिखेरने की आदत और बढ़े-बढ़ती ही रहे... मेरे लिए तो आप और आपका प्रेम ही खुशनुमा जिन्दगी की चाबी है।... हमारा यह प्रेममय सफर सालों-साल इसीतरह अपनेपन और आत्मीयता के बीच उल्लासित रहे...। 

हमारे लिए तो तुम से हम बनना, नकलीपन के बीच खालिस जीवन साथी बनना, हर खुशी और विपदा में मजबूती से परस्पर हाथ थामे डटे रहना, स्वयं से ज्यादा दूसरे के बारे में सोचना ही वास्तविक प्यार है और यही प्रेम की असल परिभाषा भी..हमारा यह प्रेम जन्म जन्मांतर तक इसी तरह कायम रहे, बढ़ता रहे…आमीन।




 



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