अमेरिकी जादूगर के नीले जादू की क़ैद में हिमाचल..!!
दुनिया भर के लोगों को अपने श्वेत-बर्फीले हुस्न, आकाश छूते चीड़-देवदार और प्रकृति के हरियाली भरे श्रृंगार से अपनी ओर खींचने वाला हिमाचल प्रदेश इन दिनों एक अमेरिकी जादूगर के नीले जादू के मोहपाश में बंधा हुआ है। आमतौर पर जादूगर वैसे तो काला जादू करते हैं लेकिन इस विदेशी जादूगर ने नीला जादू किया है और आलम यह है कि देवभूमि के अधिकतर इलाके अपनी सुध बुध खोकर इस जादू के रंग में रंग गए हैं..वहीं, हिमाचल की दिव्यता एवं भव्यता को निहारने आए पर्यटक भी इस नीले जादू के सम्मोहन से बच नहीं पा रहे हैं।
इस नीली आभा का ऐसा अद्भुत असर है जैसे आसमान स्वयं धरती से आलिंगन कर रहा है। जगह जगह बिछे नरम मुलायम नीले कालीन ने इस सौंदर्य में चार चांद लगा दिए हैं। यह जादूगर दक्षिण अमेरिका का मूल निवासी है एवं ब्राजील, अर्जेंटीना, बोलीविया, पैराग्वे में जवान हुआ है और अब दबे पांव हिमाचल में घुसपैठ कर गया है। इन दिनों इसका जादू धर्मशाला, कुल्लू, कांगड़ा और सोलन जैसे इलाकों से होते हुए पूरे राज्य में परवान चढ़ रहा है। वैसे, हिमाचल के पहले यह जादूगर अपने नीले जादू से अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल, यूरोप, फ्लोरिडा, कैलिफोर्निया को भी अपने रंग में रंग चुका है। आस्ट्रेलिया में तो इस पर बाकायदा फेस्टिवल बन गए हैं।
ज्यादा पहेलियां न बुझाते हुए अब बता ही देते हैं कि कौन है यह अमेरिका जादूगर और क्या है इसका नीला जादू…हम बात कर रहे हैं जैकारंडा (Jacaranda) की जो इन दिनों हिमाचल प्रदेश सहित देश के तमाम उष्णकटिबंधीय (tropical) क्षेत्रों को अपनी नीले सौंदर्य से आकर्षित कर रहा है। इस जादूगर का पूरा नाम Jacaranda mimosifolia है। इसका नाम भी ब्राजील से उपजा है । हालांकि हमारे यहां इसे नीला गुलमोहर, फर्न ट्री, नीलकंठ, नील मोहर, नूपुर, बांग्ला में नील कृष्ण चूड़ा, केरल में नीलवाका जैसे विविध नामों से जाना जाता है। जैकारंडा का अर्थ होता है सुगंधित एवं कठोर लकड़ी। यह पेड़ अपने नीले-बैंगनी एवं पुंगी (ट्रम्पेट) के आकार वाले फूलों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। हम इसे मैदानी इलाकों को अपने चटक लाल केसरिया फूलों से दहकाने वाले गुलमोहर का दूर के रिश्ते का भाई कह सकते हैं क्योंकि यह वैज्ञानिक रूप से अलग परिवार का होने के बाद भी आकार प्रकार और सजावट में गुलमोहर जैसा ही नजर आता है।
हमारे देश में अप्रैल से लेकर जून तक जैकारंडा का जादू सिर चढ़कर बोलता है। यह हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता को नया आयाम दे देता है। एक तरफ देवदार, चीड़ और बुरांश के हरे-लाल-गुलाबी रंग, दूसरी तरफ ये बैंगनी-नीला सैलानी। जैसे किसी विदेशी मेहमान ने घर आकर अपने उपहारों से पूरे परिवार को नए उत्साह से भर दिया हो। इन दिनों हिमाचल प्रदेश के तमाम इलाकों में मसलन सड़क के किनारे, होटलों के बगीचों में, मंदिरों के आसपास..हर जगह ये जादूगर बिना शोर शराबे के अपनी नीलिमा का कमाल दिखा रहा है।
इतना ही नहीं, इसकी खासियत यह भी है कि जब तक फूल खिले रहते हैं तो चारों ओर नीली आभा फैली रहती है और जब ये फूल झड़ते हैं तो ज़मीन पर नीला गलीचा सा बिछ जाता है। इसकी हवा में फैली हल्की सुगंध और मनमोहक नीला रंग मन को शांत कर देते है और हमें आध्यात्मिक सुकून का सा एहसास होता है । शायद यही वजह है कि हिमाचल में ये पेड़ भले ही सजावट बनकर आए थे लेकिन अब दिल जीतने का हिस्सा बन गए हैं ।
जैकारंडा का ये जादू सिर्फ खूबसूरत नीले रंग भर का नहीं है, बल्कि भाव का भी है। हिमाचल की ठंडी, शांत सुबह में जब सूरज की पहली किरण इन फूलों पर पड़ती है, तो पूरा माहौल जादुई हो जाता है और हम बस प्रकृति की इस अनुपम जादूगरी में खो जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे हमारी हिंदी फिल्मों के कई गीतों जैसे फिल्म ‘कलाकार’ का ‘नीले नीले अंबर पर..’ या फिर ‘हमराज’ का ‘नीले गगन के तले..’ या फिर फिल्म ‘आशा ज्योति’ का ‘नीले अंबर के दो नैना..’, लिखते समय गीतकार के दिल-ओ-दिमाग पर भी इस नीले जादूगर का जादू छाया हुआ था।
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