अब डिजिटल दुनिया में भी परचम लहराते आकाशवाणी और दूरदर्शन



देश में रेडियो और और टेलीविजन की दुनिया में अपना परचम लहराने के बाद अब प्रसार भारती ने डिजिटल क्षेत्र में अपने पैर फैलाने शुरू किए हैं। गौरतलब है कि प्रसार भारती देश में देश में आकाशवाणी और दूरदर्शन के नाम से रेडियो और टीवी चैनलों का संचालन करता है। यह न केवल देश का सबसे लोकप्रिय लोकसेवा प्रसारक है बल्कि अपनी बहुजन हिताय बहुजन सुखाय की नीति का पालन करते हुए देश के कोने कोने में सूचना, मनोरंजन और शिक्षा का सबसे बड़ा माध्यम भी है। दूरदर्शन और आकाशवाणी के जरिए यह देश के साथ-साथ विदेश में भी भारतीय संस्कृति, कला, साहित्य और सरकार से जुड़ी सूचनाएं संप्रेषित कर रहा है । 


डिजिटलीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के पहले मजबूत कदम के रूप में अब तक शार्ट और मीडियम वेब के जरिए अपनी सेवाएं दे रहे आकाशवाणी ने अब डिजिटल तकनीक के सहारे देश के साथ-साथ विदेश में भी क्रिस्टल क्लियर आवाज में अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन पहले ही सभी लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मसलन यूट्यूब, ट्विटर,फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपनी पकड़ मजबूत बना रहे हैं। ट्विटर पर आकाशवाणी के समाचार सेवा प्रभाग के हैंडल ऑल इंडिया रेडियो न्यूज़ के ही 3 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। यदि इसमें आकाशवाणी के हिंदी समाचार चैनल और प्रादेशिक चैनलों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या और भी कई गुना बढ़ जाएगी।


यही स्थिति यूट्यूब पर है। रेडियो के नेशनल चैनल के 5 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर और करोड़ों में व्यूज है। शिलांग सहित कई क्षेत्रीय चैनलों के सब्सक्राइबर की संख्या भी लाखों को पार कर चुकी है। भोपाल से प्रसारित समाचारों से यूट्यूब पर जुड़ने वालों की संख्या करीब 60 हज़ार और सुनने वालों की संख्या एक करोड़ होने वाली है। यही हाल अन्य क्षेत्रीय चैनलों का है। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय डिजिटल मीडिया उद्योग में प्रसार भारती के डिजिटल नेटवर्क ने सिर्फ राजस्व आधारित विकास नहीं किया है बल्कि समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित करके एक विशेष जगह बनाई है। डिजिटल दुनिया में भी जनता की सेवा करते हुए, पूर्वोत्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में प्रसार भारती के डिजिटल प्लेटफॉर्म ने यू-ट्यूब पर 220 मिलियन से अधिक बार देखे जाने और 1 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स को एक साथ जोड़कर महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।


हाल ही में, दूरदर्शन आइजोल के यू-ट्यूब चैनल ने 1 लाख सब्सक्राइबर्स की संख्या को पार कर लिया है। निश्चित रूप से व्यूज और सब्सक्राइबर्स आधार में ये वृद्धि टेलीविज़न नाटक, टेलीफिल्म्स और फिल्मों की शैलियों में उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री के कारण हुई है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो के कई ट्विटर हैंडल के हजारों की संख्या में फॉलोअर्स हैं। डीडी मिजोरम, डीडी गुवाहाटी, डीडी शिलॉन्ग और आकाशवाणी पूर्वोत्तर सेवा के यू-ट्यूब न्यूज चैनलों के सब्सक्राइबर्स का आधार काफी बड़ा है। उल्लेखनीय बात यह भी है कि प्रसार भारती के इन पूर्वोत्तर चैनलों में से अधिकांश के डिजिटल माध्यम पर लाखों में व्यूज़ हैं और देखे गए कार्यक्रम का समय लाखों घंटों में हैं, जिसमें मणिपुर का दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो चैनल सारणी में शीर्ष स्थान पर हैं।


अगर हम आकाशवाणी की बात करें तो, शॉर्ट-वेव बैंड में डिजिटल ट्रांसमिशन के आगमन से आकाशवाणी कार्यक्रमों के प्रसारण और कवरेज में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यही कारण है कि प्रसार भारती ने खर्चीली और अब आउट डेटेड मानी जा रही इस तकनीक को त्यागकर डिजिटल रास्ता अपनाया है।  लोग अब महज एक ऐप न्यूज़ ऑन एआईआर के माध्यम से देश भर के रेडियो स्टेशनों के प्रसारण को महज एक क्लिक पर क्रिस्टल क्लियर आवाज में सुन सकते हैं। यही नहीं, संसद टीवी, डीडी न्यूज़, डीडी इंडिया,किसान चैनल, डीडी उर्दू लाइव और प्रसार भारती न्यूज नेटवर्क के अपडेट भी एक क्लिक पर देख सकते हैं। इसके अलावा इस ऐप पर वे समाचार पढ़ भी सकते हैं।    


गौरतलब है कि प्रसारण उद्योग के डिजिटलीकरण का अध्ययन करने के लिए योजना आयोग द्वारा "सब-ग्रुप ऑन गोइंग डिजिटल" नामक एक अध्ययन समूह की स्थापना की गई थी।  उप-समूह की अध्यक्षता योजना आयोग के सदस्य सचिव द्वारा की गई थी।  समूह ने एनालॉग ट्रांसमिशन से डिजिटल डोमेन में माइग्रेशन पथ निर्धारित किया है और आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के मौजूदा प्रसारण को पूर्ण रूप से डिजिटल मोड में बदलने का लक्ष्य सुझाव दिया था ।


डिजिटल वर्ल्ड में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने के लिए प्रसार भारती ने अमेजन वेब सर्विस- AWS के साथ भी समझौता किया है।  इस समझौते से प्रसार भारती का प्रसारण 190 से अधिक देशों में 894 मिलियन से अधिक दर्शकों और श्रोताओं तक पहुंच जाएगा।  इस डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से, पीबीएनएस का उद्देश्य नवीन डिजिटल सामग्री प्रारूप प्रदान करना और अपने लक्षित दर्शकों, विशेष रूप से युवा दर्शकों और श्रोताओं को बेहतर ढंग से जोड़ना है।


प्रसार भारती का मानना है कि यह उसकी जिम्मेदारी है कि वह समय पर और सटीक समाचार प्रदान करें।  वह दुनिया भर में जनता को भारत के विकास और सांस्कृतिक विविधता के बारे में सूचित और शिक्षित करने का दायित्व संभाल रहा है। इसलिए एडब्ल्यूएस, प्रसार भारती के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन रोडमैप के लिए महत्वपूर्ण है, जो उसे मौजूदा और उन नए दर्शकों तक पहुंचने में मदद करेगा, जो डिजिटल रूप से सामग्री का उपभोग करते हैं।


अपने डिजिटल ढांचे को और पुख्ता करने के लिए प्रसार भारती संगठन ने अपना डिजिटल न्यूज़ डेटा मैनेजमेंट सिस्टम (NDMS) भी बनाया है। यह आंतरिक समाचार इकाइयों, सोशल मीडिया टीमों और बाहरी समाचारों के बीच सहयोग को बेहतर बनाने,  क्षेत्रीय समाचार इकाइयों में सामग्री को वर्गीकृत करने, संग्रह करने और साझा करने के लिए बनाया गया है। इसका उद्देश्य रिपोर्टरों और देशभर में फैले संवाददाताओं के लिए अपनी खबरें जल्दी से अपलोड करना और समाचार संगठनों के लिए तेजी से समाचार प्रसारित करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।  


कुल मिलाकर देखा जाए तो भविष्य के मीडिया को समय से पहले भांपते हुए प्रसार भारती ने अपने रेडियो और टीवी प्रसारण को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंचाने के तमाम रास्ते तैयार कर लिए हैं और वह दिन दूर नहीं जब देश के ये सर्वाधिक लोकप्रिय और विश्वसनीय समाचार और कार्यक्रम चैनल दुनिया भर में अपनी लोकप्रियता और त्वरित सेवाओं का परचम लहराएंगे।



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