बस,चाय पकौड़े की कमी थी..

ऐसा लगा जैसे प्रकृति अपने पूरे शबाव के साथ हमारे इस्तकबाल के लिए आ गई है। भोपाल से दिल्ली और फिर पंचकूला तक यात्रा सामान्य सी ही रही लेकिन जैसे ही हमने welcome to Himachal Pradesh का बोर्ड पार किया…बादलों के एक युवा उत्साही समूह ने तेज फुहारों के साथ हुलसकर हमारा स्वागत किया बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी नए हवाईजहाज की पहली यात्रा में पानी की फुहारों से वेलकम किया जाता है। 


इस दौरान मौसम इतना खुशगवार था कि चाय पकौड़े की कमी खलने लगी। अब प्रकृति भले ही अपने बंधु बांधवों के साथ पूरे मूड में थी लेकिन चलती सड़क पर बारिश के बीच हमारे लिए चाय और पकौड़े बनाने की हिम्मत कौन दिखाता।


बारिश ने विराम लिया तो धुंध को चीरकर पहाड़ों और घने पेड़ों ने हमें निहारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। फिर धुंध भी छट गई और हमें हिमाचल के असली सौंदर्य से साक्षात्कार  का मौका मिलने लगा। बीच बीच में सड़क किनारे परिवार के साथ भुट्टे और गरमागरम मैगी खाते लोग अपने शहर भोपाल का अहसास करा रहे थे और यह संदेश भी दे रहे थे कि मौसम के अनुकूल खाने के मामले में हम सब एक हैं। 


सड़क के बीचों बीच निडर होकर इठलाते कनेर और बोगनवेलिया के फूल यहां के अनुकूल मौसम के कारण सड़क पर अतिक्रमण करने में भी पीछे नहीं थे । वहीं,सनवारा टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतार बता रही थी कि दिल्ली और पंजाब के साथ अन्य राज्यों के लोग वीकेंड शिमला में मनाने निकल पड़े हैं। कार की छत फाड़कर (सन रुफ) बाहर निकले बच्चों के स्पर्श के लिए बादल भी कुछ नीचे आ गए थे। 


अब हम भी बादलों के बीच से ऊपर पहाड़ की परिक्रमा करते हुए शिमला पहुंच गए । शिमला में मित्र प्रकाश पंत के सौजन्य से मिले शानदार गेस्ट हाउस के आलीशान कमरे ( हाल कहना बेहतर होगा) और कमरे नुमा बाथरूम से यात्रा के शानदार समापन का सुकून मिला। गरमागरम चाय और आलू प्याज के परांठे के साथ पहले दिन की कथा पूरी हुई।

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