वाघा बार्डर से आंखों देखी:राष्ट्र गौरव की अमिट अभिव्यक्ति
ठंड की शामें उत्तर भारत में एक अनोखी रंगत भरी होती हैं। सूरज ढलते-ढलते आकाश में गुलाबी केसरिया आभा बिखेरता है, ठंडी हवाएँ हल्की सी कंपकंपी पैदा करती हैं और दूर से आती धुंध की चादर वातावरण को अपने आगोश में समेट लेती है। ऐसे में पाकिस्तान के लाहौर से महज 20 किमी और पंजाब के अमृतसर से 30 किलोमीटर दूर अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीटिंग रिट्रीट समारोह देखना ठंड में भी गर्माहट ला देता है क्योंकि यहां प्रकृति की सर्दी देशभक्ति की गर्मी से टकराती है। शाम के करीब साढ़े चार बज रहे हैं। ठंड से बचने के लिए हम भी सपरिवार शॉल, स्वेटर और जैकेट जैसे सुरक्षा कवच के साथ स्टेडियम में सबसे सामने वीआईपी सीट पर अपनी जगह ले लेते हैं। वैसे, यहां लोगों के आने का सिलसिला करीब तीन बजे से शुरू हो गया था और दर्शक दीर्घा धीरे धीरे भरने लगी है। स्टेडियम के बाहर तिरंगा ध्वज से लेकर तिरंगा कैप बेचने एवं चेहरे पर राष्ट्रीय ध्वज की छाप छोड़ने वाले कलाकार मौजूद हैं। उनके लिए भी क्रिकेट मैच की तरह यही कमाई का अवसर है। उधर, दर्शकों की भीड़ में बच्चे, बुजुर्ग, देशी विदेशी पर्यटक…सभी हैं और सबके चेहरे पर ग़ज़ब...