समंदर में मेट्रो..लहरों पर कीजिए अब सवारी !!

न तो कोई रेल लाइन है, न ही पटरियां बिछी हैं और न ही सड़क जैसा कोई प्लेटफार्म..फिर भी नीले समंदर में मेट्रो दौड़ाने की तैयारी है.. जी हां, हमारे आपके शहरों में दिनभर खटर पटर दौड़ने वाली रंग बिरंगी आकर्षक मेट्रो..जो सैकड़ों किलोमीटर में फैले विशाल समंदर में बसे तमाम टापुओं (द्वीपों) को परस्पर जोड़ने का जरिया बनेगी…लेकिन यहां इसका नाम दिल्ली मेट्रो/कोलकाता मेट्रो या लखनऊ/भोपाल मेट्रो नहीं होगा बल्कि..वॉटर मेट्रो होगा।

हम बात कर रहे हैं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में प्रस्तावित वॉटर मेट्रो की। यह ऐसी मेट्रो होगी जो न किसी ट्रैफिक जाम में फंसेगी, न सड़कों की धूल-धक्कड़ से घिरेगी और न ही शोर गुल करेगी। बस, लहरों की मस्ती और द्वीपों की हरी-भरी खूबसूरती के दीदार कराएगी। यह कोई कल्पना की उड़ान नहीं है, बल्कि भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है जो जल्दी ही हकीकत के बदलने वाली है।


जी हां, वो दिन दूर नहीं जब पर्यटकों का स्वर्ग अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, स्थानीय लोगों और सैलानियों के लिए एक सुपरफास्ट जल-परिवहन नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। वैसे भी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के हैवलॉक (अब स्वराज द्वीप) एवं नील (अब शहीद द्वीप) धीरे धीरे मॉरिशस का विकल्प बन रहे हैं क्योंकि यह कम बजट में वही आकर्षण प्रदान कर रहे हैं।

सबसे पहले तो बात करते हैं वॉटर मेट्रो योजना की। दरअसल, 2025 में इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) ने 17 शहरों में अर्बन वॉटर ट्रांसपोर्ट सिस्टम की फिजिबिलिटी स्टडी शुरू की थी और इसमें अंडमान-निकोबार को सबसे खास जगह मिली। इस स्टडी का दायित्व कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (KMRL) को सौंपा गया है। इसका कारण यह है कि कोच्चि में पहले से ही वॉटर मेट्रो चल रही है। अब बाकी तटीय इलाकों में वॉटर मेट्रो चलाने की यह योजना रफ्तार पकड़ चुकी है। केंद्र सरकार ने इस पर अमल के लिए प्रारंभिक तौर पर 9 हजार 280 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है।


जहां तक अंडमान की बात है तो यहां यह इको-फ्रेंडली वॉटर मेट्रो मुख्य रूप से फीनिक्स बे, बंबूफ्लैट और चैथम को जोड़ने का काम करेगी। इन तीनों इलाकों में आवागमन सबसे ज्यादा होता है। इस मार्ग पर रोजाना 4,000-5,000 लोग सफर करते हैं। वॉटर मेट्रो अंडमान की चाल और चेहरा दोनों बदल देगी। अभी तक स्थानीय निवासी रोजाना फेरी का इंतजार करते हैं और फेरी में बस, ट्रक, कार, साइकिल और मोटरसाइकिल के साथ चढ़कर अपने मुकाम तक पहुंचते हैं। लेकिन वॉटर मेट्रो के शुरू होने के बाद उन्हें फेरी का इंतजार करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी बल्कि इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड कैटामरान बोट्स पर सवार होकर वे मिनटों में एक द्वीप से दूसरे पर पहुंच जाएंगे।


आसान शब्दों में समझे तो वॉटर मेट्रो अत्याधुनिक सुविधाओं से सज्जित बोट्स की ऐसी सिलसिलेवार सेवा होगी जो सामान्य मेट्रो की तरह समयबद्ध रूप से चलेगी। यह सोलर एनर्जी से संचालित होगी जिससे न तो शोर होगा और न ही प्रदूषण का कोई खतरा। खासतौर पर डीजल से संचालित फेरी के स्थान पर यह पर्यावरण के लिए यह एक बड़ा कदम है, क्योंकि अंडमान जैसे संवेदनशील इकोसिस्टम में डीजल वाली फेरियां धीरे धीरे इतिहास बन जाएंगी।

वॉटर मेट्रो से सबसे ज्यादा खुश पर्यटक होंगे क्योंकि सर्वप्रथम तो उन्हें नई नवेली खूबसूरत और तेजी से चलने वाली वॉटर मेट्रो मिल जाएगी जो उनके पर्यटन अनुभव को और समृद्ध करेगी। इसके अलावा उनकी सेल्यूलर जेल से रॉस आइलैंड जैसी यात्राएं समुद्री हवाओं के साथ और आसान हो जाएंगी।

अब तक प्रस्तावित योजना में 10 द्वीपों को 76 किमी के नेटवर्क से जोड़ने की बात है। सरकार की योजना यह भी है कि ये वेसल्स इंडियन शिपयार्ड्स में बनें ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले। वॉटर मेट्रो को मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट इंटीग्रेशन के जरिए बस परिवहन से जोड़कर आम लोगों को सहज और संतुलित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

वॉटर मेट्रो पर अमल इतना आसान भी नहीं है कि पटरी बिछाई, फ्लाईओवर बनाए और चल पड़ी मेट्रो। वॉटर मेट्रो में द्वीपों की भौगोलिक स्थिति, मौसम की चाल, मानसून के तेवर, ज्वार भाटा, सुनामी एवं तूफान जैसी तमाम चुनौतियों का ध्यान रखते हुए सफर को सौ फीसदी सुरक्षित बनाना होगा। इसके अलावा, यहां की मूल जनजातियों (इंडिजेनस कम्युनिटीज) जारवा और सेंटिनेल जैसे आदिवासी समुदायों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा जिससे उनके प्राकृतिक जीवन में कोई व्यवधान न आए ।

कुल मिलाकर, वॉटर मेट्रो परियोजना न सिर्फ अंडमान के परिवहन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी बल्कि पर्यटन को नई ऊंचाईयों पर ले जाएगी। जाहिर है इससे यहां की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयां मिलेगी।

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