दो जून की या छह जून की...कौन सी रोटी है अच्छी!!
आज दो जून है तो सुबह से शाम तक सोशल मीडिया में ‘दो जून की रोटी’ छाई हुई है। हर कोई दो जून की रोटी का महत्व/संघर्ष गिनवा रहा है लेकिन मेरी समस्या यह है कि बदलते वक्त में किसे सही माने.. दो जून की रोटी को या छह जून की रोटी को। अब आप सोच रहे होंगे कि दो जून तो ठीक है पर ये छह जून क्या बला है? आपको, छह जून की रोटी का मतलब समझाने से पहले हमारे बाद की नई पीढ़ियों और खासकर जेन जी को दो जून की रोटी का मतलब समझाना ज्यादा जरूरी है। दरअसल, दो जून की रोटी एक लोकप्रिय मुहावरा है जिसका सामान्य अर्थ है दो वक्त की रोटी या दो वक्त का भोजन। हालांकि, यह मुहावरा सिर्फ भूख मिटाने की बात नहीं करता बल्कि यह संतोष का प्रतीक है। इसका अर्थ है मेहनत करके संतोष के साथ दो वक्त की सादी रोटी, सब्ज़ी और दाल जुटाना। हमारे पूर्वजों के लिए यही जीवन की असली खुशी थी। उनकी दिनचर्या भी इसी के मुताबिक निर्धारित थी..मसलन सुबह जल्दी नाश्ता, शाम को रात का खाना। बीच में कुछ नहीं क्योंकि इससे पेट को भरपूर आराम मिलता है एवं शरीर को काम करने का मौका । अब बात छह जून की रोटी की..तो दो जून की तरह छह जून की रोटी का मतलब है छ...