मौसम मौसम... लवली मौसम..."

 


अस्सी के दौर की लोकप्रिय फिल्म थोड़ी सी बेवफाई फिल्म का प्रसिद्ध गीत "मौसम मौसम... लवली मौसम..." लिखते समय गुलज़ार साहब निश्चित ही शिमला या ऐसे ही किसी पहाड़ी इलाके से गुजरे होंगे क्योंकि मौसम को महसूस किए बिना उसे शब्दों में उतारना सभी संभव है जब आपने उसका पूरा लुत्फ़ उठाया हो । बहरहाल, यह गीत इन दिनों शिमला की फिज़ाओं पर बिल्कुल सटीक बैठता है। ऐसा लगता है मानो प्रकृति स्वयं इस गीत की लय पर झूम रही हो। 

मानसून की आहट के साथ पहाड़ों की रानी शिमला ने एक बार फिर अपने सौंदर्य का नया ही रूप दिखा दिया है। बादलों की सफेद चादर कभी आसमान छूती पहाड़ियों को पूरी तरह ढक लेती है, तो अगले ही पल युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के अंदाज़ में हवा का एक जोरदार झोंका बादलों को हटाकर देवदार के ऊँचे वृक्षों और दूर तक फैली हरियाली की झलक दिखा देता है। यह आँख-मिचौली दिनभर चलती है और इतनी मनमोहक होती है कि हर देखने वाला कुछ पल के लिए ठिठक जाता है।


इन दिनों शिमला की सुबह धुंध की चादर में लिपटी हुई होती हैं।  बिल्कुल वैसे ही जैसे 'राम तेरी गंगा मैली' में गीतकार रविंद्र जैन लिखते हैं ..कोहरे की चादर लपेटे हूं,पानी में खुद को समेटे हूं। पर आप यहां मंदाकिनी के अंदाज के नहीं रह सकते बल्कि भरपूर कपड़ों और छाते के बिना इस मौसम का सामना नहीं कर सकते। सुबह उगते सूरज की किरणें जब बादलों के बीच से छनकर धरती पर उतरती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे किसी चित्रकार ने तुलिका से प्रकृति के कैनवास पर सुनहरे रंग बिखेर दिए हों । दिन चढ़ने के साथ हल्की/माध्यम/ तेज फुहारें/बौछारें वातावरण को शीतल बना देती हैं। कभी महीन बूंदें चेहरे को सहलाती हैं, तो कभी बादलों की धमाचौकड़ी यह एहसास दिलाती है कि पहाड़ों का मानसून अपने पूरे शबाब पर है।

शिमला की मॉल रोड की चहल-पहल भी इस मौसम में कुछ अलग ही दिखाई देती है। रंग-बिरंगी छतरियों के नीचे टहलते पर्यटक, हाथों में गर्म कॉफी या चाय का प्याला लिए मौसम का आनंद लेते लोग और बारिश से धुली साफ सुथरी सड़कें। प्रकृति के इस रूप को शब्दों में पूरी तरह बाँध पाना आसान नहीं है। देवदार और चीड़ के वृक्षों से आती भीगी लकड़ी की सुगंध हवा में घुलकर मन को अनायास ही ताज़गी से भर देती है। ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने अपने इत्र की सबसे सुंदर खुशबू शिमला के नाम कर दी है।


बरसात केवल मौसम नहीं बदलती, यह मन का रंग भी बदल देती है। शहर का शोर जैसे धीमा पड़ जाता है और प्रकृति की आवाज़ें स्पष्ट सुनाई देने लगती हैं। बिल्कुल वैसे ही, जैसे फिल्म '1942 ए लव स्टोरी' में गीतकार मुकुल दत्त लिखते हैं.. 'बजता है जलतरंग टीन की छत पे जब, मोतियों जैसा जल बरसे..'। यहां भी टीन की छत पर गिरकर शोर मचाती बारिश की जवाँ बूंदें, दूर कहीं गरजते बादल, पक्षियों की धीमी पुकार, पेड़ों के छिपे बंदर  और ठंडी हवा की सरसराहट। ऐसे क्षणों में शिमला केवल एक पर्यटन स्थल नहीं रहता, बल्कि वह एक ऐसी अनुभूति बन जाता है जिसे बस महसूस किया जा सकता है।


इन दिनों शिमला में हल्की से मध्यम बारिश, घने बादल और ठंडी हवाओं का सिलसिला बना हुआ है। तापमान लगभग 15 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच है, जिससे मौसम और भी सुहावना बना हुआ है। सच ही है, जब बादल धरती को चूमने उतर आएँ, हवा प्रेमगीत गुनगुनाने लगे, देवदार धुंध की चादर ओढ़ लें और हर ओर हरियाली मुस्कुरा उठे, तब अनायास ही मन गुनगुनाते लगता है—"मौसम मौसम... लवली मौसम..."। 

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