“अयोध्या 22 जनवरी": अयोध्या के बारे में जानकारीपूर्ण, दिलचस्प, विस्तृत और विचारोत्तेजक विवरण

           ।।विश्व पुस्तक दिवस पर विशेष।। 

“अयोध्या 22 जनवरी" पुस्तक में, लेखक संजीव शर्मा पाठकों को भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक के माध्यम से एक मनोरंजक यात्रा पर ले जाते हैं और कुशलता से अयोध्या की मनोरम जानकारी से परिचित कराते हैं। यह पुस्तक 22 जनवरी, 2024 को राम मंदिर के ऐतिहासिक उद्घाटन से पहले और उसके बाद की घटनाओं की व्यापक समझ प्रदान करती है। 'अयोध्या 22 जनवरी' पुस्तक की कथावस्तु अयोध्या को आकार देने वाले सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य का एक विचारशील अन्वेषण है। पुस्तक में कहानी कहने का ढंग इतना आकर्षक है कि यह विद्वानों से लेकर अयोध्या की जटिलताओं से अपरिचित लोगों दोनों के लिए सरल भाषा और रोचक शैली में सामग्री उपलब्ध कराती है। पुस्तक की भाषा लेखक की पहली किताब ‘चार देश चालीस कहानियां’ की तरह रोचक और सरल दोनों है । अयोध्या के बारे में जानकारीपूर्ण, दिलचस्प, विस्तृत और विचारोत्तेजक विवरण चाहने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए अत्यधिक अनुशंसित पुस्तक।


“अयोध्या22जनवरी” पर कुछ पाठकों की प्रतिक्रिया 

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के तत्कालीन कुलगुरू प्रोफ़ेसर K G Suresh ने कहा:

“ #अयोध्या22जनवरी एक संग्रहणीय पुस्तक है, विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ साथ सभी को पढ़नी चाहिए।”

वरिष्ठ पत्रकार और जाने माने कला समीक्षक Girija Shanker जी ने कहा:

“करंट विषय पर तत्काल किताब लिखना चैलेंजिंग होता है। #ayodhya22january  अपनी शैली की अलग किताब है जो अयोध्या पर बेस मैटेरियल का काम करेगी।”

भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो Sanjay Dwivedi  ने कहा:

“आकाशवाणी, भोपाल के समाचार संपादक श्री संजीव शर्मा की नई किताब #अयोध्या22जनवरी अयोध्या प्रसंग को समझने में मदद करती है। किताब को भोपाल के लोक प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। उम्मीद है किताब पाठकों का प्यार पाएगी।”

वरिष्ठ पत्रकार और बी एस टीवी न्यूज चैनल के प्रमुख Pravin Dubey  ने कहा:

“पौराणिक और वर्तमान के सन्दर्भों को एक साथ पिरोकर बेहतरीन किताब की शक्ल में लिखा है Sanjeev Sharma जी ने...नाम है #अयोध्या22जनवरी......यदि सिर्फ इतिहास होता तो शायद बोझिल हो जाता...या सिर्फ वर्तमान की घटनाएं होती तो वो शायद आँखों देखी जैसा रिपोर्टर टाइप वर्णन हो जाता... चूँकि वे बेहतरीन पत्रकार होने के साथ साथ अच्छे लेखक भी हैं....उन्हें क़िस्सागोई भी आती है और यथार्थ का चित्रण भी..ज़ाहिर है कि ऐसे में  वो संदर्भ भी प्रस्तुत करते हैं तो प्रवाह के साथ...यदि आपने अब तक इस किताब को नहीं पढ़ा है तो पढ़िए...इसलिए भी पढ़िए कि आपका तादाम्य ये प्रभु से भी स्थापित करेगी और आपको इस सदी के सबसे बड़े धार्मिक घटनाक्रम का साक्षी भी बनाएगी.. “


संचार विशेषज्ञ, लेखक और व्यंग्यकार Sanjeev Persai ने लिखा:

#अयोध्या22जनवरी, पुस्तक रामलला की प्राणप्रतिष्ठा और मंदिर निर्माण की जानकारियों को समाहित करके लाया गया संभवतः देश का प्रथम दस्तावेज है। ये सच है कि राममंदिर का प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने जरूरत से ज्यादा कवरेज किया। लेकिन इस कवरेज में अधिकतर, जरूरत का था ही नहीं। यह पुस्तक राम मंदिर और 22 जनवरी की ऐतिहासिक घटना का विस्तारपूर्वक विवरण आपको देती है। इसमें दर्ज घटनाएं, जानकारियां, विवरण, उनकी पृष्ठभूमि पढ़ते पढ़ते आप रोमांचित भी होते हैं और यदा कदा आश्चर्यचकित भी।“

जाने माने कमेंट्रेटर और समाचार वाचक Prashant Singh Sengar  ने लिखा है:

#अयोध्या22जनवरी ....बड़ी बधाई के पात्र हैं संजीव जी..। बहुत खूब रचना है यह..। इसमें न केवल भगवान श्रीराम, न केवल अयोध्या और न ही केवल अलौकिक श्रीराम मंदिर के बारे में व्यवस्थित तरीके से जानकारी दी गई है बल्कि भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण से देश में उपजने वाली संभावनाओं और देश को सैंकड़ो वर्षो बाद मिली अकल्पनीय भावनात्मक उपलब्धि को भी प्रदर्शित किया गया है” । 

सामाजिक और संचार विशेषज्ञ,पत्रकार,कार्टूनिस्ट और अपनी लेखनी से गुदगुदाने  वाले लेखक श्री Sanjay Saxena ने लिखा:

“यह पुस्तक आने वाली पीढ़ी के लिए  ऐतिहासिक प्रसंग को महसूस करने का जरिया साबित होगी। इसलिए #अयोध्या22जनवरी किताब को हर परिवार को खरीद कर रखना चाहिए। ताकि संपत्ति के साथ, विचारों को भी विरासत के रूप में सौपा जा सके।"

 समाचार वाचक और प्रेजेंटर Dharana Sachdev ने लिखा है:

#अयोध्या22जनवरी एक ऐतिहासिक दिन, उस पर यह भावपूर्ण, अति सुंदर रचना, निश्चय ही सहेजने योग्य, एक ऐतिहासिक दस्तावेज की तरह है। निश्चित तौर पर सभी आयु वर्ग के पढ़ने योग्य अनमोल-अद्भुत संग्रह है। A real treasure.”

हरियाणा के Govt. PG College, Hisar में न्यूक्लियर फिजिक्स विभाग के प्रमुख रहे और इसी विषय से डॉक्टरेट करने वाले प्रोफेसर डॉ राधा कृष्ण ग्रोवर ने लिखा है:

“ये किताब सभी के लिए एक अनमोल तोहफ़ा है।  "A Real Historical Document"। श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों को जिस प्रासंगिकता के साथ हर चैप्टर में जो जोड़ा गया है, भाषा का ज्ञान व इस्तेमाल, ये सभी लेखन की खूबियों और बारीकियों को दर्शाता है। इस सब के लिए लेखक संजीव शर्मा अभिवादन और शुभकामनाओं के योग्य हैं।"

सहायक ज़िला आबकारी अधिकारी से रिटायर हुए श्री डी पी सिंह ने तो आर के नारायण के समकक्ष खड़ा कर दिया। उन्होंने बताया:

“अभी #अयोध्या22जनवरी के साथ, आर के नारायण की भी एक बुक पढ़ रहा हूं…दोनो बहुत टक्कर के लेखक हैं । अयोध्या और मौजूदा घटनाक्रम का बहुत अच्छा विस्तृत वर्णन है..बहुत अच्छा लिखा है।”

बनखेड़ी से श्री रमेश  कुमार शर्मा जी ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है:

"बहुत अच्छा  उच्चतम कोटि का संकलन है। मानस की चौपाइयां को अयोध्या से जोड़ते हुए तुमने बहुत पुनीत कार्य किया है। पुस्तक में अयोध्या की सारी जानकारियां प्रमुख रूप से दी गई है, जो बहुत कम लोग जानते है।..मैने इस पुस्तक को एक ही बार में लगभग 2 से 3 घंटों में पढ़ा । ईश्वर, तुम्हारी लेखनी को इसी तरह और शानदार बनाये रखे।"

#अयोध्या22जनवरी पुस्तक पर ये चुनिंदा प्रतिक्रियाएं हैं। वैसे, प्रतिक्रियाएं तो खूब मिली हैं और समीक्षाएं और सराहना भी,इतनी कि भविष्य में एक अलग किताब बन जाए। यदि आप भी #Ayodhya22January पढ़ना चाहते हैं तो इनमें से किसी भी माध्यम से हासिल कर सकते हैं।

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