चांदनी रात में शिमला का सौंदर्य


 पूर्णिमा की रात में चंद्रमा के धवल प्रकाश के बीच शिमला की 12 से 15 डिग्री की ठंडी हवा वातावरण में सिहरन घोल रही है। मॉल रोड पर टहलते हुए पर्यटकों की भीड़ के बीच चंद्रमा की सोलह कलाओं से दमकती रात में ऐसा लग रहा है मानो पूरा शहर किसी उत्सव की तैयारी में हो। रात का अंधेरा गहराते ही पूर्ण गोलाई लिए चंद्रमा ने धीरे-धीरे आकाश पर पूरीतरह से अपना अधिकार जमा लिया ।

मॉल रोड के मध्य खड़ा ऐतिहासिक चर्च अपनी पीली रोशनी में किसी यूरोपीय चित्रकला जैसा प्रतीत हो रहा है। वहीं, चर्च की ऊंची मीनार के पीछे चमकता चंद्रमा ऐसा लग रहा है मानो किसी कलाकार ने आकाश पर चांदी का विशाल दीप टांग दिया हो।  पीली लाइट को अपने घेरे में लिए दूधिया रोशनी में नहाया चर्च और भी भव्य लग रहा है।


उधर, दूर जाखू पहाड़ी की चोटी पर विराजमान हनुमान जी की विशाल प्रतिमा भी अद्भुत आभा बिखेर रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे स्वयं बजरंगबली शिमला की रक्षा के लिए रात्रि प्रहरी बनकर खड़े हों। नीचे मॉल रोड पर टहलते लोगों की चहल-पहल, नवयुगलों का मीठा सा कोलाहल, देवदार के वृक्षों की सरसराहट और ऊपर शांत, उज्ज्वल चंद्रमा—इन सबने मिलकर ऐसा दृश्य रचा था जिसे शब्दों में पूरी तरह बांध पाना कठिन है। 

इस बीच, मॉल रोड पर सजे कैफे और दुकानों की रोशनियां भी जगमगाने लगी हैं। पहाड़ों की ढलानों पर बसे घरों की चमचमाती बत्तियां दूर से ऐसी दिखाई दे रही हैं जैसे धरती पर असंख्य जुगनू उतर आए हों। चेहरे को छूकर गुजरते और देवदार की भीनी सुगंध अपने साथ ले आते ठंडी हवा के झोंके बीच बीच में इस स्वप्न लोक से बाहर ले आते हैं।


वही, पर्यटक रुक-रुककर चांदनी के आगोश में समाएं शिमला के इन दृश्यों को अपने कैमरों में कैद कर साथ ले जाने में जुट हैं, लेकिन आंखों में समा रहा यह सौंदर्य किसी भी तस्वीर से कहीं अधिक जीवंत, मोहक और स्मरणीय है।

आकाश में घुमड़ती काले बादलों की कतार कभी-कभी चंद्रमा के सामने से गुजरकर उसने ढकने का असफल प्रयास करती हैं तो ऐसा लगता है जैसे मॉल रोड पर हनीमून मनाने आई किसी नववधू ने अपने किसी आदरणीय को एकाएक सामने देखकर दुपट्टे से घूंघट ओढ़ने की कोशिश की हो।

 कुछ ही क्षण बाद जब बादल हट जाते हैं और चंद्रमा फिर पूरी शान से चमक उठता है तो नव युगलों की अठखेलियां भी बेपर्दा होने लगती हैं। चर्च के इर्दगिर्द पसरी नवविवाहित जोड़ों की खिलखिलाहट घंटियों की सी मधुर ध्वनि और दूर जाखू की पहाड़ी पर पसरी निस्तब्धता मिलकर वातावरण को रोमांटिक एवं आध्यात्मिक सा स्पर्श दे रहे हैं ।


जब देश के अधिकतर इलाके सूरज के गुस्से से दो चार हो रहे हैं और गर्म हवा के थपेड़े चेहरे को किसी थप्पड़ की तरह लाल कर रहे हैं.. तब शिमला में चंद्रमा की धवल रोशनी में ठंडी हवा के झोंके धरती पर स्वर्ग से कम महसूस नहीं होते।

आज शिमला केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, आस्था और सौंदर्य का जीवंत संगम है। पूर्णिमा का चंद्रमा पूरे शहर को अपनी चांदनी में भिगोकर शायद यही संदेश दे रहा था कि प्रकृति के सबसे सुंदर दृश्य अक्सर शोर में नहीं, बल्कि शांति में रचे जाते हैं।


टिप्पणियाँ

  1. सजीव और शानदार चित्रणll पूर्णिमा की रात्रि सदैव से ही मेरे लिए आकर्षण का केंद्र रही हैl तुम्हारी आंखों से शिमला की पूर्णिमा कि चांद के दर्शन अद्भुत अलौकिक हैंl

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    1. धन्यवाद राजेंद्र भाई, एक तो खूबसूरत चाँद,ऊपर से सुंदर शहर..अद्भुत

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