शनिवार, 19 सितंबर 2026

गंगटोक की सड़कों पर दौड़ता एक अनूठा संदेश..!!


यदि आप हाल ही के दिनों में सिक्किम की राजधानी गंगटोक गए हों तो यहां की सड़कों पर चलते हुए एक बात ने सहज ही आपका ध्यान आकर्षित किया होगा। पिछले हफ्ते सिक्किम की यात्रा के दौरान मुझे तो इस संदेश ने बार बार अपनी ओर खींचा। यहां तकरीबन सभी टैक्सियों और अन्य सार्वजनिक परिवहन वाहनों के पीछे बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा रहता है-“BE KIND TO ANIMALS”। 

पहली नजर में मुझे भी यह किसी स्थानीय पशु-प्रेमी संस्था का जागरूकता अभियान लगा  लेकिन करीब आठ दिन के इस प्रवास में यह वाक्य दिल-ओ-दिमाग पर इतना छा गया कि हमने इसके पीछे की कहानी पता करने का पक्का मन बना लिया। इस बारे में साथ चलने वाले ड्राइवरों, होटल स्टाफ और मेल मुलाकात के दौरान अधिकारियों से जानकारी हासिल की तो पता चला कि यह किसी एनजीओ का अभियान नहीं बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय पहल है।

दरअसल, देश भर में सड़कों को पशु पक्षियों के लिए सुरक्षित बनाने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 25 फरवरी 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के परिवहन विभागों को सार्वजनिक परिवहन वाहनों पर पशु कल्याण से जुड़ा यह संदेश प्रदर्शित करने का निर्देश दिया था। मंत्रालय ने इस संदेश को हिंदी या संबंधित राज्य की भाषा में 1 अप्रैल 2025 से लागू करने के लिए कहा गया था।

इसके पीछे केवल पशुओं के प्रति संवेदना जगाने की भावना ही नहीं, बल्कि सड़कों पर पशुओं की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। 

सिक्किम ने इस राष्ट्रीय पहल को अपने यहां लागू करते हुए 10 अक्टूबर 2025 को परिवहन विभाग के मोटर व्हीकल डिवीजन के माध्यम से अधिसूचना जारी की। इसके तहत राज्य में पंजीकृत सभी सार्वजनिक परिवहन वाहनों पर “Be Kind to Animals” संदेश प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया। सबसे खास बात यह है कि इस संदेश के लिए शब्दों का आकार प्रकार तक तय कर दिया ताकि यह संदेश वाहन के आगे और पीछे, स्पष्ट और आसानी से दिखाई देने वाले अक्षरों में नजर आए। अक्षरों की न्यूनतम ऊंचाई 150 मिलीमीटर यानी 15 सेंटीमीटर रखी गई है। 

सिक्किम के पहाड़ी रास्तों और घने वन क्षेत्रों के संदर्भ में इस संदेश का महत्व भी है। वैसे, राज्य सरकार के एक सड़क सुरक्षा कार्यक्रम में भी रोड किल (roadkill) यानी सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मृत्यु को एक महत्वपूर्ण चिंता के रूप में रेखांकित किया गया और “Be Kind to Animals” जागरूकता पहल को इसके समाधान के उपायों में शामिल किया गया।

गंगटोक में फिलहाल ट्रेन सुविधा तो हर नहीं इसलिए यहां आने जाने वाले हजारों लोगों के लिए यहां की छोटी बड़ी टैक्सियां ही एकमात्र सहारा हैं। यह संदेश वाहनों पर लिखने का फायदा यह है कि अब वाहन सिर्फ यात्री को एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जाते, बल्कि दिनभर पूरे रास्ते में एक विचार भी पहुंचाते हैं कि सड़क केवल इंसानों के लिए प्रकृति के अन्य जीवंत सहचरों के लिए भी है।

हम सभी जानते हैं कि पहाड़ों में सड़कें जंगलों, गांवों और वन्य जीवों के बीच से होकर गुजरती हैं। आमतौर पर मोड़ इसतरह के होते हैं कि सड़क पर जीव जंतु तो दूर सामने से आने वाले वाहन भी नजर नहीं आ पाते। ऐसे में कई बार वाहन चालक के सामने अचानक कोई कुत्ता, गाय, बंदर या वन्यजीव आ जाता है। ऐसे में एक पल की सावधानी किसी जीव की जान बचा सकती है। यह संदेश इस भावना को मजबूत बनाने का दायित्व निभा रहा है।

यही वजह है कि गंगटोक की सड़कों पर यह संदेश महज एक स्टिकर नहीं लगता बल्कि चलती हुई टैक्सियों के पीछे लिखा यह वाक्य लगातार याद दिलाता है कि विकास और यातायात की रफ्तार के बीच संवेदना के लिए भी जगह बची रहनी चाहिए। यहां “Be Kind to Animals” केवल तीन शब्दों का संदेश भर नहीं है,पहाड़ों पर इंसान और प्रकृति के रिश्तों को और मजबूत बनाने की पहल भी है।


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