रविवार, 30 अगस्त 2026

कुत्ते की राखी…कीमत सुनकर आप चौंक जाएंगे!

Pet Rakhi

हाल ही में कृति सेनन से जुड़े एक राखी विज्ञापन को लेकर खूब विवाद हुआ। विज्ञापन में कृति के कपड़ों से लेकर उसके कथित सांस्कृतिक संदेश तक पर बहस हुई और आखिरकार विज्ञापन वापस लेना पड़ा। लेकिन इस पूरे विवाद में पालतू जानवरों के लिए बाजार में बिक रही राखियां और उनकी कीमतों से जुड़ा दिलचस्प पहलू लगभग अनदेखा रह गया है।

सवाल यह नहीं कि कुत्ते या बिल्ली को राखी बांधनी चाहिए या नहीं। सवाल यह है कि जिस बाजार में कभी राखी कुछ पैसों में मिल जाती थी, वहां अब पालतू जानवरों की राखी भी सैकड़ों और कुछ मामलों में हजारों रुपये की हो गई है।

मसलन, GIVA नामक जिस कंपनी के विज्ञापन पर विवाद हुआ था उसका कुत्तों और बिल्लियों के लिए राखी( Pet Collection) आपकी हमारी राखी से कई गुना महंगा है । यहां पालतू जानवर (पेट) के लिए पेंडेंट और नेकलेस लगभग 2,999 से 5,499 रुपये तक बताए जा रहे हैं। ब्रेसलेट सेट की कीमत करीब 3,699 से 8,999 रुपये तक है, जबकि पेट राखियां और दूसरी एक्सेसरीज लगभग 2,299 रुपये से शुरू होती हैं। मतलब जिस राखी को हमारी दादी-नानी के दौर में प्रेम का प्रतीक बनाने के लिए महंगी चीज की जरूरत नहीं थी, आज उसी भावना का Pet Rakhi Market एक नया बाजार तैयार हो गया है।

मौजूदा दौर में रक्षाबंधन का त्योहार जैसे-जैसे बदल रहा है, राखी भी बदल रही है। कभी भाई की कलाई पर बंधा धागा ही इस रिश्ते की सबसे बड़ी निशानी हुआ करता था। फिर इसमें चांदी, सोना, मोती और डिजाइनर राखियों का प्रवेश हुआ। अब बाजार ने एक नया रिश्ता खोज लिया है—इंसान और उसके पालतू जानवर का रिश्ता।

इस बाजार की सबसे मजेदार बात यह है कि अब पालतू कुत्ता सिर्फ ‘पालतू’ नहीं रहा। वह परिवार का सदस्य है, घर का बच्चा है और कई लोगों के लिए तो बाकायदा ‘भाई’ या ‘बहन’ भी है। इसलिए बाजार ने उसके लिए भी वही भावनाएं पैकेज कर दी हैं।

भारत का लोकप्रिय पेट केयर ब्रांड Heads Up For Tails (HUFT) इस बार भी पेट्स के लिए विशेष कलेक्शन लेकर आया था। ‘दिल का टुकड़ा’ और ‘पाव्सम भाई (Pawsome Bhai)’ जैसे नामों वाली राखियां यह बताती हैं कि बाजार अब सिर्फ उत्पाद नहीं बेच रहा, वह रिश्ते की नई भाषा भी गढ़ रहा है।

इन राखियों की शुरुआती कीमत लगभग 199 से 399 रुपये के आसपास है। साथ में पालतू जानवरों के लिए बहन और इंसानी भाई के साथ मैचिंग वाले कुर्ते और पारंपरिक कपड़े भी उपलब्ध हैं। इसका मतलब यह हुआ कि अगर इंसानी भाई ने नया कुर्ता पहन लिया तो घर के ‘पॉसम भाई’ को भी वैसा ही हूबहू कुर्ता पहनाया जा सकता है।

‘पाव्सम भाई (Pawsome Bhai) शब्द की पैदाइश की कहानी भी मजेदार है। जैसे इंग्लिश में तारीफ के लिए awesome शब्द का सामान्य तौर पर इस्तेमाल होता है तो इससे समतुल्य Pawsome शब्द गढ़ किया गया। इसमें Paw का अर्थ है -कुत्ते/बिल्ली के पंजे। इसलिए “Pawsome Bhai” का अर्थ हुआ “कमाल का पंजों वाला भाई”।

कहानी अभी बाकी है..अगर आपको लगता है कि पेट राखी मतलब बस रंगीन धागा और दो-चार मोती, तो बाजार आपको गलत साबित कर देगा। डिजाइनर ब्रांड Tonoto ने हाथ से कढ़ाई वाली प्रीमियम राखियों को पेट फैशन का हिस्सा बना दिया है। ‘Tricks for Treats’, ‘Top Dog’ और ‘Bed Hog’ जैसे संदेशों वाली राखियां इसकी खासियत हैं। इनकी कीमत लगभग 500 से 800 रुपये तक बताई जाती है।

यहां रंगों का चुनाव भी सिर्फ फैशन के लिए नहीं बताया जाता। कुत्तों की रंग पहचान की क्षमता को ध्यान में रखते हुए नीले और पेस्टल रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही ये राखियां कुत्ता बिल्ली खा ले तो भी उसे कोई नुकसान नहीं होगा । इन राखियों को Chew-friendly टैग हासिल है। इसका अर्थ है कि ये राखियां पालतू जानवरों के चबाने के लिए सुरक्षित हैं।

एक फर्क यह है कि पालतू जानवरों के लिए राखी का डिजाइन इंसानों की राखी से अलग है। With All My Paw (WAMP) जैसे ब्रांड ने नेक-राखी की शैली पेश की । ‘Sock Thief’ और ‘Jigra’ जैसे नामों वाली ये राखियां गले में कॉलर की तरह पहनी जा सकती हैं। इसका एक व्यावहारिक कारण भी है। हाथ में राखी बांधने का सवाल ही नहीं, इसलिए पेट की गर्दन अब उसकी ‘कलाई’ बन गई! इनकी कीमत लगभग 799 रुपये के आसपास बताई जाती है।

बाजार को रिश्ते में निजीपन की कमी लगती है तो उसके पास उसका भी समाधान है। Ferns N Petals (FNP) जैसी गिफ्टिंग साइट्स पर पेट के नाम वाली पर्सनलाइज्ड राखियां उपलब्ध हैं। यानी ‘रॉकी’, ‘सिम्बा’, ‘लियो’ या ‘मिस्टी’—जिस नाम से आपका पालतू जानवर घर में पुकारा जाता है, वही राखी पर भी दर्ज हो सकता है। इनकी कीमत लगभग 349 से 499 रुपये के आसपास है।

दूसरी ओर Wrapinfur जैसी साइटों पर हाथ से बनी पर्ल और पॉ-प्रिंट (पंजे के डिजाइन वाली) राखियां लगभग 179 से 289 रुपये तक मिलती हैं। Supertails पर भी पेट के लिए विशेष राखियां लगभग 199 रुपये से उपलब्ध बताई जाती हैं।

जानकारों का कहना है कि भारत के शहरों में एकल परिवार की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसी तरह अकेले रहने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है और पालतू जानवरों के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी बढ़ा है। इसलिए पालतू जानवरों के लिए जन्मदिन का केक है, कपड़े हैं, जूते हैं, स्पा है, फोटोशूट है और अब रक्षाबंधन की राखी भी ।

कृति सेनन के विज्ञापन पर बहस में हमने कपड़ों को, संस्कृति को, विज्ञापन की भाषा का तो जमकर विश्लेषण कर लिया। लेकिन शायद यह नहीं देख पाए कि भारत में रिश्तों का बाजार कितनी तेजी से फैल रहा है। कल तक रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार था। आज उसमें दोस्त, चचेरे-ममेरे रिश्ते, सैनिकों को राखी, पर्यावरण के नाम पर राखी और अब पालतू जानवर भी शामिल हो रहे हैं। यह बदलाव अच्छा है या बाजारवाद की नई चाल, इस पर बहस हो सकती है लेकिन इतना तय है कि जिस घर में कुत्ता ‘घर का सदस्य’ है, वहां राखी की थाली में अब उसके लिए भी जगह बन गई है।


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