कुछ लोग उम्र नहीं बढ़ाते… वे जीवन को बड़ा कर देते हैं।
कुछ रिश्ते जितने कम बोले जाएँ, उतने ही अधिक महसूस किए जाते हैं लेकिन जीवन में कुछ अवसर ऐसे भी आते हैं, जब मन की कृतज्ञता शब्दों का सहारा मांग ही लेती है। आज ऐसा ही एक दिन है। आज मनीषा जी का 51वाँ जन्मदिन है—जीवन के स्वर्ण जयंती वर्ष के बाद का पहला पड़ाव। यह पड़ाव केवल कैलेंडर के पन्नों पर जुड़ी एक संख्या नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, त्याग, धैर्य और अपनत्व से रचे गए अनगिनत अध्यायों का उत्सव है। लगभग 26 वर्षों के हमारे साथ में, मैंने एक बात बहुत गहराई से समझी है कि किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके शब्दों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार से बनती है..और यदि मुझे मनीषा जी को एक ही वाक्य में परिभाषित करना हो तो मैं बस इतना कहूँगा—वे उन दुर्लभ लोगों में हैं जो स्वयं से अधिक दूसरों की खुशियों में जीते हैं। कई लोग अच्छे होते हैं, कई लोग सज्जन भी होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिनके मन में किसी के लिए ईर्ष्या, द्वेष या कटुता का स्थान ही नहीं होता। मनीषा जी उन्हीं विरले लोगों में से हैं। किसी के सुख में प्रसन्न होना, किसी की परेशानी में बिना बुलाए साथ खड़े हो जाना, किसी की छोटी-सी उपलब्धि ...