क्या आपने कभी देखें..!! है नमक के खेत..!!


चने के खेत, गेहूं के खेत, गन्ने के खेत..तो हम सभी ने खूब देखें हैं और सरसों के खेत यश चोपड़ा की फिल्मों का प्रमुख आकर्षण रहा है। सरसों के खेत इतने रोमांटिक हो सकते हैं ये हमें ‘दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ जैसी फिल्मों से ही पता चला है क्योंकि हम तो फिल्म ‘अंजाम’ के गीत ‘जोरा जोरी चने के खेत में..’ या फिल्म ‘तराजू’ के गाने ‘चल गन्ने  के खेत में अप्पा काहे शर्माए रे..’ जैसे गीतों से बेचारे खेतों का चरित्र समझते रहे हैं।

खैर, यहां हम खेतों का चरित्र चित्रण नहीं कर रहे बल्कि आपको एक ऐसे खेत से मिलवाना चाहते हैं जिसके बारे आप में से कई लोगों ने शायद सुना भी नहीं होगा। मुझे भी, इनके बारे में देखने के बाद ही पता चला। हम बात कर रहे हैं ‘नमक के खेत’ की…जी हां, सही सुना आपने नमक के खेत। नमक का दारोगा, नमक हलाल और नमक हराम के बाद नमक के खेत..बिल्कुल हमारे गांवों के खेतों की तरह, बस फर्क यह है कि इनमें गेहूं-चना नहीं नमक होता है।

हाल ही में, सोमनाथ की यात्रा के दौरान जब हम सड़क मार्ग से अहमदाबाद आ रहे थे तो गुजरात के शानदार हाईवे से गुजरते हुए भावनगर के आसपास हमें सफेदी से भरे खेत नजर आए..खेतों में सफेदी देखकर चौंकना लाज़मी था क्योंकि बरसात तो थी नहीं कि ‘फूले कांस सकल महि छाए..’ समझकर सफेदी देखें। फिर हमारे गाइड-सह-ड्राइवर-सह-इनोवा के मालिक हार्दिक भाई ने बताया कि ये नमक के खेत हैं। अब बारी थी इस नई जानकारी को समझने और विश्लेषण की।

दरअसल,खम्भात की खाड़ी के किनारे बसा भावनगर गुजरात में नमक उत्पादन का गढ़ है। दरअसल, यहाँ का नमक सिर्फ घरेलू इस्तेमाल की चीज नहीं, बल्कि औद्योगिक प्रगति एवं वित्तीय मजबूती का आधार है। यहाँ बने नमक के खेतों में समुद्री पानी से सौर वाष्पीकरण (सोलर एवापोरेशन) के पारंपरिक तरीके से नमक पैदा किया जाता है। गुजरात में जहाँ कच्छ का रण विशाल सफ़ेद रेगिस्तान की तरह दिखाई पड़ता है, वहीं भावनगर में ये खेत रंग-बिरंगे दिखाई देते हैं… नीले समुदी पानी से भरे तालाबों से लेकर चमकते सफ़ेद क्रिस्टल तक..इन खेतों को देखना किसी यादगार अनुभव की तरह है। सुबह खेतों में भरा खारा पानी आकाश का दर्पण बन जाता है तो दिन में धूप और सूरज की किरणों के साथ नीला, हरा, और बैंगनी बिखरने लगते हैं । ऐसा लगता है जैसे प्रकृति पानी पर चित्रकारी कर रही हो । 

सुबह होते ही मजदूरों के समूह के समूह काम पर लग जाते हैं। यहाँ बनने वाला नमक मरीन सॉल्ट है क्योंकि यह खाड़ी के पानी से बनता है। नमक बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले खेतों को मेड़ों से बाँटकर तालाब की तरह बनाया जाता है। फिर समुद्री पानी को छोटे-छोटे हिस्सों में भरा जाता है। धूप की गर्मी पाकर पानी धीरे-धीरे वाष्पित होकर उड़ जाता है। पहले हल्के नमक के अलावा अन्य खनिज प्राकृतिक रूप से अलग होते हैं और फिर आखिरी चरण में शुद्ध सफ़ेद नमक के क्रिस्टल जमने लगते हैं। 

एक अनुमान के मुताबिक एक एकड़ से पचास से सौ टन तक नमक निकल आता है। भावनगर में कई कंपनियाँ ऐसी हैं जो सालाना लाखों टन नमक की खेती कर रही हैं। गुजरात भारत का सबसे बड़ा नमक उत्पादक राज्य है, जो देश की कुल नमक उत्पादन का लगभग 75-80 प्रतिशत का योगदान देता है। हालांकि जानकार यह भी बताते हैं कि मौसम में लगातार आ रहे बदलाव के कारण नमक की खेती पर गहरा असर पड़ा है। इससे नमक का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। 

आंकड़ों के मुताबिक पहले नौ महीने तक नमक का उत्पादन होता था, अब यह छह महीने तक सिमट गया है। यहां आए दिन आने वाले चक्रवातों ने भी उत्पादन में कमी ला दी है। इसका कारण यह है कि बारिश और चक्रवात के कारण खेतों में गाद जम जाती है और परिणामस्वरूप खेतों को फिर से तैयार करने में महीनों लग जाते हैं। हालांकि नमक उत्पादक मौसम से निपटने के लिए बेहतर ड्रेनेज और वाशिंग प्लांट जैसे कदम उठा रहे हैं। 

नमक हमारे भोजन में स्वाद और उत्पादकों की जेब गरम करता है लेकिन नमक के खेतों में काम करने वाले मजदूरों की सेहत पर भी गहरा असर डालता है। इसलिए अगली बार जब भी आप अपने भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए नमक डाले तो याद रखें कि हर छोटी-सी चुटकी में स्वाद और कमाई के साथ श्रमिकों का संघर्ष एवं सेहत का जोख़िम भी लगा है इसलिए इसे महज रसोई घर का एक हिस्सा न माने बल्कि जीवन का संघर्ष और देश के साथ साथ किचिन की रीढ़ भी समझे। 

इसी तरह, कभी भावनगर या इसके जैसे किसी नमक उत्पादक इलाके से गुजरे तो कार रोककर नमक के खेत जरूर देखें ताकि आप भी समझ सकें कि नमक केवल आपका स्वाद नहीं बल्कि देश के सैकड़ों लोगों के संघर्ष की कहानी है।

#Salt #Gujrat #Bhavnagar 







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