अनूठा ज्वालामुखी..जिसके साथ ले सकते हैं सेल्फी !!
‘ज्वालामुखी’ नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं..आग का दरिया, चारों ओर बहता लाल आग सा दहकता लावा, रासायनिक गैसे और बहुत कुछ..इसके पास जाना तक नामुमकिन होता है। लेकिन हम बात कर रहे हैं एक जैसे ज्वालामुखी की जहां न आग है, न लावा, फिर भी धरती अपने अंदर जमा सामग्री बाहर उड़ेल रही है। यह ज्वालामुखी ऐसा है जिसे आप छू सकते हैं, इसके पास खड़े हो सकते हैं, फोटो खिंचवा सकते हैं और इसके बाद भी आपको घबराहट के स्थान पर सुकून मिलेगा…यह ‘मड वॉल्कानो’ यानि मिट्टी वाला ज्वालामुखी।
मड वॉल्कानो (Mud Volcano) वाकई प्रकृति का एक अनोखा और रहस्यमयी चमत्कार है। खास बात यह है कि भारत का एकमात्र सक्रिय मड वॉल्कानो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बाराटांग द्वीप (Baratang Island) पर स्थित है। वैसे, गूगल गुरु के मुताबिक दुनिया भर में केवल 2500 के आसपास मड वॉल्कानो हैं लेकिन हमारे देश में अंडमान के अलावा ये कहीं और नहीं मिलते।
जैसा की हम सभी जानते हैं कि सामान्य ज्वालामुखी लावा उगलते हैं, लेकिन मड वॉल्कानो या मिट्टी के ज्वालामुखी ठंडी कीचड़, पानी और गैसों का मिश्रण बाहर निकालते हैं। यहाँ कोई लावा या आग नहीं होती—बस बुलबुले बनते हैं, कीचड़/मिट्टी धीरे-धीरे बहता रहता है और छोटे-छोटे गड्ढे या टीले बन जाते हैं। आमतौर पर मड वॉल्कानो का कारण पृथ्वी की गहराई में जैविक सामग्री से मीथेन और अन्य गैसें निकलने को माना जाता हैं। ये गैसें दबाव बनाकर कीचड़ और पानी को ऊपर धकेलती हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि अंडमान में टेक्टॉनिक प्लेटों के दबाव के कारण इसतरह के ज्वालामुखी बन रहे हैं । मड वोल्केनो का तापमान लगभग 29-30 डिग्री सेल्सियस और स्वभाव क्षारीय होता है।
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक अंडमान द्वीपों में कुल 11 मड वोल्केनो हैं। जहां तक सबसे प्रमुख मड वॉल्कानो की बात है तो यह बाराटांग द्वीप पर है, जो पोर्ट ब्लेयर से लगभग 100-150 किमी दूर है। स्थानीय लोग इसे जलकी कहते है। वैसे, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बारे में सबसे रोचक बात यह भी है कि हमारे देश का लावा वाला एक सक्रिय ज्वालामुखी बैरन आइलैंड भी यहीं है, और कीचड़ वाला मड वॉल्कानो भी।
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अध्ययन में पता चला कि बाराटांग के मड वॉल्कानो से निकली मिट्टी ओलिगोसीन युग (Oligocene age) अर्थात् करीब 2.3 करोड़ साल पुरानी है। एकतरह से यह मिट्टी और इससे जुड़े अध्ययन हमें पृथ्वी के उस समय के भूगर्भीय इतिहास को समझने में मदद कर सकते हैं । हम बाराटांग में जिस मड वॉल्कानो को देखने गए वह पिछले साल अक्टूबर में फटा है और यह घटना भी करीब 20 साल के बाद घटी है इसलिए यहां पर्यटकों का तांता लगा हुआ है । वन विभाग के अधिकारियों के साथ हम भी घटना स्थल तक गए। मड वॉल्कानो फटने के कारण यहां 3-4 मीटर ऊंचे टीले बन गए हैं और फुटबॉल के मैदान जैसे करीब 500-1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में कीचड़ फैल गया । देखने में यह एरिया लावा वाले ज्वालामुखी फटने की तरह ही लगता है और यहां बने टीलों से अभी भी मिट्टी बह रही है और बुलबुले के रूप में गैस बाहर निकल रही हैं।
जब हमने मड वॉल्कानो के बारे में वन विभाग, अन्य संबंधित विभागों और इंटरनेट की मदद ली तो जानकारी मिली कि अंडमान के मड वॉल्कानो कहीं न कहीं 2004 के सुमात्रा-अंडमान भूकंप और उसके साथ आई सुनामी से संबंधित हैं। अब तो वैज्ञानिक इन मड वॉल्कानो को मंगल ग्रह (Mars) पर मौजूद संभावित मड वॉल्कानो के साथ मिलाकर अध्ययन कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि बाराटांग के मड वॉल्कानो की संरचना मंगल गृह की इसी तरह की संरचनाओं से काफी मिलती-जुलती है। कुल मिलाकर यह भी पृथ्वी के तमाम चमत्कारों में से एक है और आने वाले समय में अध्ययन के बाद शायद यह कहीं ऐसे रहस्य उजागर करने का जरिया बने जिन्हें पृथ्वी ने अब तक अपने गर्भ में छिपाकर रखा है।
(लेखक इन दिनों अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के भ्रमण पर हैं।)




अदभुत
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